नई पड़ोसन।
प्रेषक : राजेश,
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम राजेश है मैं इलाहबाद का रहने वाला हूँ और कुछ दिनों पहले मेरे सामने वाले घर में नये किरायेदार रहने को आए, वो सिर्फ़ पति पत्नी ही थे, पति बिजनस के कारण बाहर रहते थे। अब में भी अकेला और वो भी अकेली तो हम दोनों में बातचीत होती रहती थी। फिर एक दिन भाभी ने मुझसे पूछ लिया कि आजकल खाना कैसे बना रहे हो? तो मैंने कहा कि होटल में जाकर खाता हूँ। फिर वो बोली कि आजकल बाहर का खाना काफ़ी पसंद आ रहा है, क्या बात है? तो में बोला कि क्या करें? घर में कोई बनाने वाली नहीं है? तो भाभी बोली कि आज रात रोटी सब्जी में भेज दूँगी। फिर मैंने कहा कि नहीं अगर ऐसा है तो घर पर आकर रोटियाँ बना देना और सब्जी तो कच्ची पक्की में भी बना सकता हूँ। फिर भाभी बोली कि नहीं में आकर बना जाऊंगी।
अब में खुश हो गया था कि इसी बहाने मुझे उसके पास रहने का मौका मिलेगा और अब मैंने बाहर से कुछ सब्जी मँगवा ली थी। फिर उस रात 8 बजे भाभी अपना काम ख़त्म करके मेरे लिए रोटी बनाने आ गई। फिर मैंने उसको आटा दे दिया और अंदर वाले कमरे में आकर टी.वी देखने लगा, लेकिन अब मेरा ध्यान भाभी की तरफ ही था। अब मेरा मन कर रहा था कि भाभी बोले कि इधर आ जाओ और में जल्दी से उसको चोद डालूं, लेकिन डर लगता था। फिर मैंने कुछ देर टी.वी पर इधर उधर देखने के बाद फैशन टी.वी चला दिया, तो उस टाईम शो चल रहा था तो में अंजान बनते हुए उसे देखने लगा और सोचने लगा कि काश भाभी वही से मुझे देखते हुए ये सब देख ले।
अब में भी चोरी से भाभी को देख रहा था कि वो देखती है या नहीं। फिर थोड़ी देर के बाद भाभी हाथ में रोटी लिए किचन से झाँकी तो उसकी नजर टी.वी पर पड़ी और वो काफ़ी देर तक कभी टी.वी को तो कभी मुझे देखती रही और में अंजान बना बैठा रहा। फिर जब भाभी फिर से किचन में चली गई तो मैंने टी.वी चालू छोड़कर उठा और किचन में चला गया। फिर मैंने कहा कि भाभी मुझे भी रोटियाँ बनाना सिखा दो और उसके पास जाकर खड़ा हो गया। अब मेरी आँखे उसके मस्त बूब्स पर लगी हुई थी और उसके बड़े-बड़े बूब्स मस्ती से हिल रहे थे। फिर मैंने कहा कि अरे भाभी आपको तो पसीना आ रहा है। अब मेरी नजर उसके बूब्स पर ही था, तो उसने एकदम से अपनी चुन्नी ठीक कर ली और बोली कि शैतान कही का। फिर मेरी हिम्मत बढ़ गई और में थोड़ा सा उसके और पास चला गया और बोला कि भाभी रोटी बनाना सीखाओ ना और आटे को छेड़ने लगा, तो इसी छेड़छाड़ में मेरा हाथ उसके बूब्स पर लग गया तो मैंने एकदम से अपना हाथ पीछे खींच लिया और वो कुछ नहीं बोली।
अब मेरा लंड खड़ा होने लगा था तो में आटे के साथ खेलता हुआ उसके और करीब जाने लगा और इतना करीब कि मेरा लंड उसकी मस्त गदराई भरी हुई गांड पर छू गया। फिर वो अब भी कुछ नहीं बोली तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई। फिर मैंने कहा कि भाभी तुम तो बड़ी सुंदर हो और भैया तुम्हें बहुत खुश रखते होगे? तो भाभी बोली कि अच्छा में तुझे सुंदर लगती हूँ, कहाँ से? तो मैंने कहा कि कहाँ-कहाँ से कहूँ? तुम तो सभी जगह से सुंदर हो। फिर भाभी बोली कि मुझे तेरी नियत ठीक नहीं लगती, में तो घर जा रही हूँ। फिर मैंने कहा कि अरे आप तो नाराज़ हो रही हो, में तो मज़ाक कर रहा था। अब मेरा लंड अभी भी उसकी गांड को टच कर रहा था और रोड की तरह खड़ा हो रहा था। फिर वो चुपचाप रोटी बनाने लगी और में उसकी कभी गांड, कभी कमर, कभी बूब्स और कभी उसके गोरे-गोर गालों को देखता जा रहा था।
अब धीरे-धीरे मेरा लंड तना जा रहा था। फिर मैंने धीरे-धीरे अपने एक हाथ से उसके गालों को छुआ और कहा कि भाभी तुम्हारे गाल कितने सुंदर है? तो भाभी बोली कि अच्छा और उसने कुछ नहीं कहा। फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई। फिर मैंने उसकी कमर पर अपना एक हाथ रखकर कहा कि भाभी तुम्हारी कमर कितनी चिकनी और पतली है? तो उसके मुँह से सिसकारी सी निकल गई। अब में समझ गया था कि अब बात बन सकती है। फिर में धीरे से उसके पीछे आ गया और उसकी कमर को पकड़ते हुए अपने लंड को उसकी गांड के बीच की जगह पर रख दिया। फिर मेरे लंड को रखते ही मेरे और उसके मुँह से एक साथ लंबी सी सिसकारी की आवाज निकली और उसने रोटी बनाना छोड़कर आगे से मेरी गांड पकड़ ली, तो मैंने भी उसको कमर से टाईट पकड़ लिया और उसके गले पर किस करने लगा। अब वो एकदम मदहोश हुए जा रही थी और में भी। अब मेरे लंड का बुरा हाल था और अब किचन में हम दोनों की सिसकियाँ गूँज रही थी अम्म्म्मम, ऊफफफफ।
फिर वो बोली कि अगर कोई आ गया तो मेरा क्या होगा? तो मैंने कहा कि कोई नहीं आएगा, तुम चुप रहो,फिर में उसकी शमीज के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाते हुए उसे रूम में ले गया और बेड पर पटक दिया। फिर मैंने उसकी लिप्स किस ली और कम से कम 5 मिनट तक उसका लिप्स चूसता रहा और उसके बूब्स को चूसने लगा। तो वो बोली कि ओह बड़ा मज़ा आ रहा है और करो ना, नीचे भी किस करो। अब उसकी चूत गीली हो चुकी थी और उसने पेंटी नहीं पहन रखी थी, तो मेरी उंगली आसानी से उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत में जा रही थी। अब वो बहुत ज़ोर जोर से आवाजे कर रही थी आआआअहह, उूउऊहह, चुसो, आहह और जोर से, अब वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे नीचे की तरफ आते हुए उसकी चूत के ऊपर अपना मुँह रख दिया।
फिर उसकी चूत पर अपना मुँह रखते ही वो जोर से चिल्ला उठी आआहह, ओमम्म्मममम, चाटो ना जोर से, सस्स्सस्स और मचलने लगी और अपनी गांड को इधर उधर घुमाने लगी। अब उसके ऐसा करने से मेरे लंड में भी सनसनी होने लगी थी। फिर मैंने अपनी पेंट खोली और अपना लंड उसके हाथ में थमा दिया। अब मेरा लंड तनकर पूरा 9 इंच का हो गया था। फिर मैंने अपना लंड उसके हाथों में पकड़ा दिया, तो उसने मेरा लंड पकड़कर सीधा अपने मुँह में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगी। फिर मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए तो अचानक से मेरे लंड से पानी निकलकर उसके मुँह में चला गया और वो मेरा सारा पानी पी गई और फिर भी वो मेरे लंड को चूसती रही, जब तक कि वो दुबारा से खड़ा नहीं हो गया। अब इस बीच में अपने पैर की उंगली से उसकी चूत को रगड़ रहा था और उसका भी पानी निकल गया था।
अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था तो मैंने उसको उठाकर उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी, तो वो ज़ोर से चिल्लाई आहह अब लंड डाल दो, अब और इंतज़ार नहीं होता, प्लीज जल्दी करो ना, प्लीज आहहह। फिर जब मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली की तो वो मेरे लंड को ज़ोर से आगे पीछे करने लगी उसकी चूत पूरी डबल रोटी की तरह फूली हुई थी। फिर मैंने उसे अपना लंड चूसने के लिए बोला, तो उसने मना कर दिया। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है, जल्दी से चोद दो, मेरी चूत में आग लग रही है। अब वो ज़ोर-जोर से हाँफ रही थी और जैसे कोई कई मीलों से दौड़कर आई हो और आहह, एम्म, ओह, डालो ना अंदर जैसी आवाजे निकल रही थी।
फिर मैंने उसे सीधा लेटाया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया और उसके दोनों पैरों को फैलाया और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब जब मेरे लंड का सुपड़ा ही उसकी चूत में गया था तो वो ज़ोर से चिल्लाने लगी कि नहीं मुझे छोड़ दो, नहीं में मर जाउंगी, अपना लंड बाहर निकाल लो, लेकिन मैंने उसे अनसुना करते हुए एक ज़ोर का धक्का लगाया तो वो और ज़ोर से चिल्लाई। फिर मैंने उसके लिप्स पर किस करते हुए उसके मुँह को बंद किया और अपने धक्के लगाता गया। अब वो झटपटा रही थी और अपने बदन को इधर से उधर करने लगी, लेकिन में नहीं माना। अब में धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था और अब उसकी आँखों से आसूँ निकल रहे थे। फिर कुछ देर के बाद मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया।
फिर में कुछ देर के लिए उसके ऊपर ही पड़ा रहा तो कुछ देर के बाद वो शांत हुई और मुझे गालियाँ देने लगी, साले तूने यह क्या कर दिया? अपना लंड बाहर निकालो, मुझे नहीं चुदवाना। अब में उसके बूब्स को चूसने लगा था और अपने एक हाथ से उसके बालों और कानों के पास सहलाने लगा था और फिर कुछ देर के बाद मैंने उसके कानों को भी चूमना शुरू कर दिया तो कुछ देर के बाद वो फिर से गर्म हो गई। फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू किया तो पहले तो वो चिल्लाई, लेकिन फिर कुछ देर के बाद मैंने पूछा कि मज़ा आ रहा है। फिर वो बोली कि हाँ बहुत मज़ा आ रहा है, हाईईईईई, म्म्म्मम और फिर वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी। फिर कुछ देर के बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।अब में अपनी स्पीड धीरे-धीरे बढ़ाता जा रहा था आआआजा, आईसीईई, चोदो और जोर से चोदो। आज मेरी चूत को फाड़ दो, आज कुछ भी हो जाए लेकिन मेरी चूत फाड़े बगैर मत झड़ना, आआआआ और ज़ोर से, उउउईईईई माँ, आहह हाँ, अब ऐसे ही वो चिल्ला रही थी।
फिर कुछ देर के बाद मैंने महसूस किया कि मेरा लंड पानी से भीग रहा है। अब वो भी अपना पानी छोड़ने वाली थी, अब वो नीचे से अपनी कमर उठा-उठाकर चिल्ला रही थी और बडबड़ा रही थी आहहहहहह और चोदो मेरी चूत को, आज मत छोड़ना, इसे भोसड़ा बना देना और फिर कुछ देर के बाद वो बोली हाए मेरे राजा में झड़ने वाली हूँ। अब में भी झड़ने के करीब पहुँच गया था, क्योंकि हम लोग बिना रुके 20 मिनट से चुदाई कर रहे थे। फिर में बोला कि हाँ भाभी में भी झड़ने वाला हूँ और फिर मैंने उसकी गांड पकड़कर अपनी स्पीड बढ़ा दी, तो वो भी कुछ देर के बाद झड़ गई। अब में भी झड़ने के करीब आ गया था और फिर कुछ देर के बाद में भी झड़ गया। अब उसने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया था और में भी उसके बूब्स के ऊपर ही पड़ा रहा। फिर कुछ देर के बाद उसने मेरे लंड को और मैंने उसकी चूत को साफ किया। फिर आखरी में भाभी बोली कि तेरे भैया का तो सिर्फ़ 5 इंच का है, एकदम छोटा है और उनका खेल 2 मिनट में ही ख़त्म हो जाता है, हमारी शादी को 3 साल हुए है और उनके बिजनस के कारण उन्होंने आज तक मुझे इतनी ख़ुशी कभी नहीं दी है और फिर उसके बाद हमने 5 बार और सेक्स किया। यह सब 8 महीने तक चलता रहा फिर वो कही और शिफ्ट हो गए फिर भाभी से कभी मुलाक़ात नही हुई।
धन्यवाद
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