जेठानी का लंड
मुम्बई के बडे शहर मेँ दीप्ति अपने पति गोपाल और एकमात्र 20 साल का बेटा अजय के साथ रहती थी । बडा खुशहाल परिवार था उसका । गोपाल का छोटा भाई कुमार अपनी पत्नी के साथ बाहर रहता था । एक दिन शोभा और कुमार अपने बडे भाई गोपाल और दीप्ति के घर पर आये हुये थे । उस वक्त सब लोग एक हत्या की कहानी पर आधारित फिल्म देख रहे थे । आम मसाला फिल्म की तरह इस फिल्म में भी कुछ कामुक दृश्य थें । एक आवेशपूर्ण और गहन प्यार दृश्य आते ही अजय कमरें को छोड़ कर जा चुका था । गोपाल और दीप्ति दृश्य के आते ही और लड़के के कमरा छोड़ने के कारण जम से गये थे ।
घर के ऊपर और सब सोने के कमरें थे और और शाम को जब से ये लोग आये थे, कोई भी ऊपर नहीं गया था । नौकर सामान लेकर आया था और गोपाल, कुमार शराब के पैग बना रहे थे । महिलायें भी इस वक्त उनके साथ बैठ कर पी रही थी । हालांकि परिवार को पूरी तरह से माता पिता की रूढ़िवादी चौकस निगाहों के अधीन रखा गया था । बड़ों के आसपास होने पर महिलायें सिंदूर, मंगलसूत्र और साड़ी परंपरागत तरीके से पहनती थी । कुमार के बड़े भाई होने के नाते, शोभा के लिए, गोपाल भी बङे थे और वह अपने सिर को उनकी उपस्थिति में ढक कर रखती थी । लेकिन चूंकि, दोनों कुमार और गोपाल बड़े शहरों में और बड़ी कंपनियों में काम करने वाले है, सो उनके अपने घरों में जीवन शैली जो बड़े पैमाने पर उदार है ।
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शोभा और दीप्ति दोनो बङे शहरों से थी अतः उनके विचार काफी उन्मुक्त थे । लेकिन ये सब के चलते एक बहुत बडा राज छुपा हुआ था उस घर मेँ जो सिर्फ गोपाल और शोभा को ही मालुम था । दोनों महिलायें हमेशा नये फैशन के कपडे पहन कर ही यात्रा करती थी, खासकर जब घर के माता पिता साथ नहीं होते थे । हालांकि, दोनों की उम्र में दस साल का अंतर है, दीप्ति अपनी वरिष्ठता का उपयोग करते हुए घर में नये फैशन की सहमति बनाती थी । इस प्रकार, बिना आस्तीन के ब्लाउज, पुश ब्रा, खुली पीठ के ब्लाउज और मेकअप का उपयोग होता था ।
हालांकि, यह स्वतंत्रता केवल छुट्टीयां व्यतीत करते समय के लिये ही दी गई है । सामान्य दिनचर्या में ऐसी चीजों के लिये कोई जगह नहीं थी । वे अक्सर सेक्स जीवन की बातें आपस में बाटती थीं और यहाँ से भी दोनों में काफी समानतायें थीं । दोनों ही पुरुष बहुत प्रयोगवादी नहीं थें और सेक्स एक दिनचर्या ही था । लेकिन अगली पीढ़ी का अजय बहुत अलग था । वह एक और अधिक उदार माहौल में, भारत के बड़े शहरों में बङा हुआ था । लड़का बड़ा हो गया था और बहुत जल्द ही अब एक पुरुष होने वाला था । ये बात भी शोभा ने इस बार नोट की थी । फिल्म में प्रेम दृश्य आने पर वह कमरा छोड़कर गया था इसी से स्पष्ट था उसें काफी कुछ मालूम था ।
बचपन में गर्मीयों की छुट्टी अजय शोभा के यहां ही बिताता था । एक छोटे लड़के के रूप में शोभा उसको स्नान भी कराती थी । कई बार कुमार की कामोद्दीपक उपन्यास गायब हो जाते थे वह खोजने पर वह उनको अजय के कमरे में पाती थी । इस बारे में सोच कर ही वह कभी कभी उत्तेजित हो जाती थी पर अजय के एक सामान्य स्वस्थ लड़का होने के कारण वह इस बारे में चुप रही । अजय के कमरा छोडने के फौरन बाद, गोपाल और कुमार भी थकने का बहाना बना कर जा रहे थे ।
बचपन में गर्मीयों की छुट्टी अजय शोभा के यहां ही बिताता था । एक छोटे लड़के के रूप में शोभा उसको स्नान भी कराती थी । कई बार कुमार की कामोद्दीपक उपन्यास गायब हो जाते थे वह खोजने पर वह उनको अजय के कमरे में पाती थी । इस बारे में सोच कर ही वह कभी कभी उत्तेजित हो जाती थी पर अजय के एक सामान्य स्वस्थ लड़का होने के कारण वह इस बारे में चुप रही । अजय के कमरा छोडने के फौरन बाद, गोपाल और कुमार भी थकने का बहाना बना कर जा रहे थे ।
शोभा को कोई संदेह ना था कि ये क्या हो सकता है । दीप्ति से उसकी नजरें एक बार मिली थी । पर दीप्ति अपनी चेहरे पर एक शरारती मुस्कराहट भरी और सीढ़ियों पर चल दी । शराब का नशा होने के बाद भी फिल्म का असर शोभा पर काफी अच्छा रहा था ।फिल्म के उस प्रेम दृश्य में आदमी उस औरत को जानवरों की तरह चौपाया बना कर चोद रहा था । अपने कॉलेज के दिनों में शोभा ने इस सब के बारें में के बारे में अश्लील साहित्य में पढ़ा था और कुछ अश्लील फिल्मों में देखा भी था लेकिन अपने पति के साथ कभी इस का अनुभव नहीं किया । इस विषय की चर्चा अपने पति से करना उसके लिये बहुत सहज नहीं था । उनके लिए सेक्स शरीर की एक जरूरी गतिविधि थी । शोभा ने अपने आप को चारों ओर से उसके पल्लू से लपेट लिया । इन मादक द्रुश्य के प्रभाव से उसे एक कंपकंपी महसूस हो रही थी । इस वक्त वह सोच रही थी कि कुमार अब कहां हैं?
शोभा को नींद आ रही थी और उसने ऊपर जाकर सोने का निर्णय लिया । ऊपर जाते ही न जाने कहाँ से जेठानी आ गयी, “सो, कैसा चल रहा है सब कुछ”, शोभा ने पूछा । “क्या कैसा चल रहा है?” दीप्ति ने शंकित स्वर में पूछा । “वहीं सबकुछ, आपके और भाई साहब के बीच में..” शोभा ने दीप्ति को कुहनी मारते हुये कहा । दोनों के बीच सालों से चलता आ रहा था इस तरह का मजाक और छेड़खानी । “आह, वो”, दीप्ति ने दिमाग को झटका सा दिया । “दीदी, क्या हुआ?” शोभा के स्वर ने दीप्ति के विचारों को तोड़ा । “नहीं, कुछ नहीं । आओ, हॉल में बैठ कर बातें करते हैं” । साड़ी के पल्लू से अपने हाथ पोंछती हुई दीप्ति बाहर हॉल की तरफ़ बढ़ गई । हॉल में इस समय कोई नहीं था । दोनों मर्द अपने अपने कमरों मे सोने चले गये थे और अजय का कहीं अता पता नहीं था । दीप्ति सोफ़े पर पसर गई और शोभा उसके बगल में आकर जमीन पर ही बैठ गयी ।
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“आपने जवाब नहीं दिया दीदी ।”
“क्या जवाब?” दीप्ति झुंझला गयी । ये औरत चुप नहीं रह सकती । शोभा के कन्धे पर दबाव बढ़ाते हुये दीप्ति ने कहा ।
“आपने मेरी बरसों से दबी हुई इच्छाओं को भड़का दिया है इस सिनेमा के बारे में सोचने भर से मेरी चूत में पानी भर रहा है ।” शोभा बोली । दीप्ति ने शोभा की ठोड़ी पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर उठाया, बोली “उदास मत हो छोटी, आज मैँ हुं ना, आज जेठानी तेरी बुर से पानी निकालेगी । शोभा दीप्ति के शब्दों से दंग रह गयी,”क्या कह रही हो दीदी? ।”
और शोभा को हाथ पकड़ कर अपने पास खींचा और बाहों में भर लिया । शोभा के हाथ दीप्ति की पीठ पर मचल रहे थे । जेठानी के बदन से उठती आग वो महसूस कर सकती थी । उसके हाथ अब शोभा के स्तनों पर थे । अंगूठे से वो अपनी देवरानी के निप्पल को दबाने सहलाने लगी । अपनी बहन जैसी जेठानी से मिले इस सिग्नल के बाद तो शोभा के जिस्म में बिजलियां सी दौड़ने लगीं । दीप्ति भी अपने ब्लाऊज और साड़ी के बीच नन्गी पीठ पर शोभा के कांपते हाथों से सिहर उठी ।
अपने चेहरे को शोभा के चेहरे से सटाते हुये दीप्ति ने दूसरा हाथ भी शोभा के दूसरे स्तन पर जमा दिया । दोनों पन्जों ने शोभा के यौवन कपोतों को मसलना शुरु कर दिया । शोभा के स्तन आकार में दीप्ति के स्तनों से कहीं बड़े और भारी थे । शोभा ने पीछे हटते हुये दीप्ति और अपने बीच में थोड़ी जगह बना ली ताकि दीप्ति आराम से उसके दुखते हुये मुम्मों को सहला सके । उसका चेहरा दीप्ति के गालों से रगड़ रहा था और होंठ थरथरा रहे थे । शोभा की गर्म सांसे दीप्ति के चेहरे पर पड़ रहीं थीं । दोनों के होंठ एक दूसरे की और लपके और अगले ही पल दोनों औरतें प्रेमी युगल की भांति एक दूसरे को किस कर रही थीं । दोनों की अनुभवी जीभ एक दूसरे के मुहं में समाई हुई थी ।
“तुम्हारे मुम्मे तो मेरे मुम्मों से भी कहीं ज्यादा भरे हुये है, जी भर के चूसा होगा इनको देवर जी ने” दीप्ति ने अपनी स्तनों को ब्लाऊज के ऊपर से ही दबाते हुये बोली
शोभा दीप्ति के मन की बात समझ गई और तुरन्त ही जेठानी की ब्लाऊज के सारे बटन खोल कर पीछे पीठ पर ब्रा के हुक भी खोल दिये दीप्ति के भारी भारी चूचें अपनी जामुन जैसे बड़े निप्पलों के साथ बाहर को उछल पड़े । शोभा जीवन में पहली बार किसी दुसरी औरत के स्तनों को देख रही थी । कितने मोटे और रसीले है ये । दीप्ति ने दोनों हाथों में उठा कर अपने चूंचे शोभा की तरफ़ बढ़ाये । शोभा झुकी और तनी हुई निप्पलों पर चुम्बनों की बारिश सी कर दी । “ओह, शोभाआआआ” दीप्ति आनन्द से सीत्कारी । शोभा ने एक निप्पल अपने मुहं मे ही दबा लिया । उसकी जीभ जेठानी की तनी हुई घुंडी पर वैसे ही नाच रही थी जैसे वो रोज रात पति की गुलाबी सुपाड़े पर फ़ुदकती थी । पहली बार एक औरत के साथ । नया ही अनुभव था ये तो । दीप्ति खुद एक स्त्री होने के नाते वो ये जानती थी की शोभा क्या चाहती है । शोभा के बदन में भी अलग ही आकर्षण था । उसके शरीर में भी वही जोश और उत्तेजना थी । ये सोचते सोचते ही दीप्ति ने भी शोभा के निप्पल को चबाने लगी ।
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“आऊच…आह्ह्ह” शोभा के मुहं से दबी हुई चीख भी निकली । दीप्ति अब उस बिचारे निप्पल पर अपने दातों का प्रयोग कर रही थी । शोभा अपना दूसरा स्तन हाथ में भर लिया । दीप्ति ने शोभा का थूक से सना निप्पल छोड़ दिया और फ़िर से शोभा के निप्पल को मुहं में भर लिया और पहले से भी ज्यादा तीव्रता से चुसाई में जुट गयी मानो निप्पल नहीं लंड हो जो थोड़ी देर में ही अपना पानी छोड़ देगा । “आआआह्ह्ह्ह्ह्ह॥ दीदी, प्लीज जोर से चूसो, हां हां”, शोभा दीप्ति को उकसाते हुये चीखी । उसकी चूत में तो बिजली का करंट सा दौड़ रहा था । “यहां, देखो यहां घुसती है मर्द की जुबान”, शोभा ने फ़ुर्ती के साथ दीप्ति कि साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर पैन्टी की कसी हुई इलास्टिक में हाथ घुसेड़ दिया । पैन्टी को खींच कर उतारने का प्रयास किया तो शोभा की हाथ में कोई बडे मांस पिंड जैसा चीज लगी । उसने उपर जेठानी की तरफ देखा, दीप्ति मुस्करा रही थी ।
तभी दीप्ति ने खुद ही साड़ी और पेटिकोट को कमर पर इकट्ठा कर उन्गली फ़सा अपनी पैन्टी नीचे जांघों तक सरका दी, शोभा की आँखेँ एकदम खुले के खुले रह गए । पहली बार शोभा को इतना बडा सदमा लगा । दीप्ति के पैन्टी निचे सरकते ही एक 8 इंच का लम्बा और मोटा लंड बाहर निकल आया, साथ मेँ बडे-बडे अंडे जैसे अंडकोष दीप्ति के लंड घने काले झाँटोँ से भरे थे। क्या मनमोहक द्रुश्य था शोभा के सामने । उसकी सगी बहन जैसी जेठानी पूरी तरह से औरत नहीँ थी । स्त्री के शरीर मेँ पुरुषांग । स्त्री और पुरुष के अद्भुतपूर्व मिश्रण थे दीप्ति की बदन मेँ । और दीप्ति के लंड के तो क्या कहने! 8 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा था दीप्ति की लंड । इतना बडा लंड जिन्दगी मेँ पहली बार देख रही थी शोभा । अपनी पति कुमार का तो अपनी भाभी के लंड का आधा ही होगा । शोभा बडे प्यार से जेठानी की लंड को मुठ्ठी मेँ भर कर बडे-बडे अंडकोष पर जिभ फिराते हुए उपर दीप्ति की मुखडे को देखने लगी । दीप्ति की चेहरे पर मुस्कराहट था ।”ये क्या है दीदी ? और अजजययय…..कैसा….?” शोभा लंड को चाटती हुई पुछी । “ये बहुत लम्बी कहानी है किसी दिन बैठ के बताउंगी ।”
दीप्ति बोली ।”फिर भी कुछ तो बताईये, दीदी । “शोभा ने जिद पे उतर आई ।”बस इतना समझ लो कि मेरी ख्वाईशेँ, मेरी तमन्ना पूरी हुई है । पिछले पांच साल हो गए मेरी इस बदलाव को ।” “मतलब मेरी प्यारी जेठानी पांच सालोँ से साडी के निचे लंड लिए इसी घर मेँ घुम फिर रही हैँ ?” शोभा आश्चर्य होकर पुछी ।”हां छोटी, मैँ पिछले पांच सालोँ से लंड लिए अपनी पति और बेटे के साथ जिंदगी गुजार रही हुं । तुम्हारे जेठ जी को ये मालुम है और खुशी-खुशी मुझे स्वीकारा है और अब मैँ इस बदलाव यानि की मेरी लंड का भरपुर मजा उठाना चाहती हुं ।” दीप्ति ने बात पूरी की ।”पर दिदी, क्या अजय को ये मालुम है कि उसकी प्यारी माँ की मर्द के जैसा लंड है, उसकी माँ बाकी महिलाओँ से अलग है ? “”नहीँ, यही डर मुझे हमेशा लगी रहती है! कि कब उसे ये बात पता लग जाएगा ।” दीप्ति ने शंका जाहिर करते हुए कहा ।”नहीँ दीदी, कुछ नहीँ होगा मैँ उसे मना लुंगी बस अब के सोचिए दीदी आपकी ये विशाल लंड देख कर मुझसे और रहा नहीँ जाता ।” कहती हुई शोभा ने जेठानी की तने लंड को मुठ्ठी मेँ भर ली ।
इधर दीप्ति ने फ़िर से शोभा के स्तनों को जकड़ा उधर शोभा भी पूरी तैयारी में थी । दीप्ति की समझ में तो कुछ भी नहीं आ रहा था और शोभा अपने जिस्म में उमड़ती उत्तेजना से नशे में झूम रही थी ।
शोभा के कपडे पूरी तरह से अस्त व्यस्त थे । शोभा उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठी हुई थी । उसकी साड़ी का पल्लू बिस्तर पर बिछा हुआ था । लो कट के ब्लाउज से विशाल स्तनों के बीच की दरार साफ दिख रही थी । आखिरकार शोभा ने खुद ही कमरे में प्रवेश किया था और अब वो जेठानी की लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी । दीप्ति ने वापस अपना हाथ शोभा के सिर पर रख कर उसकी मुंह में लंड घुसेडने का प्रयास कर रही थी । इस जोर जबरदस्ती में दीप्ति की फुंफकार मारता लंड शोभा के सिर, बालों और सिन्दूर से रगड खा के रह गया । अपना लक्ष्य चूक जाने से दीप्ति का लंड और भी तन गया और उसके मुंह से एक आह सी निकली । शोभा ने नीचे झुककर देखा तो ब्लाउज का लो कट गला, दो भारी स्तनों और उनके बीच की दरार का शानदार दृश्य दीप्ति को दिखा रहा था । शोभा का मंगलसूत्र इस वक्त उसके गले से लटका हुआ दो बङी बङी गेंदों के बीच में झूल रहा था । शोभा ने तुरन्त ही अपनी शादी की इस निशानी को वापिस से ब्लाउज में डाला और वहीं पास पडे साड़ी के पल्लू से खुद को ढकने की कोशिश की । तब तक दीप्ति दोनों हाथों से शोभा के उरोजों को बेदर्दी से मसल दिया ।
दीप्ति ने धक्का दे कर शोभा को हटाया और खुद बिस्तर के बगल में खङी हो गईं । दीप्ति की उत्तेजना स्वभाविक थी । भारी साँसों के कारण ऊपर नीचे होते उनके स्तन, गोरे चेहरे और बिखरे हुए बाल, मांग में भरा हुआ सिंदूर और पारंपरिक भारतीय पहनावा उनके इस रूप को और भी गरिमामय तरीके से उत्तेजक बना रहा था ,उसने अपनी पेटीकोट को कमर के ऊपर सरका राखी थी और दीप्ति की मांसल जांघोँ के मध्य सबसे विशालकाय लंड हवा में लहरा रहा था ।
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शोभा ने अब खुद ही अपना ब्लाउज खोलना शुरु कर दिया । दीप्ति ने भी आगे बढते हुये शोभा के तने हुये चूचों के ऊपर चुम्बनों की बारिश सी कर दी । दीप्ति ने जेठानी के सिर को अपने दोनों स्तनों के बीच में दबोच लिया । इस समय दीप्ति अपना एक घुटना बिस्तर पर टेककर और दूसरे पैर फर्श पर रख कर खडी हुई थीं । दीप्ति ब्रा के ऊपर से ही होंठों से शोभा के स्तनों पर मालिश कर रही थी । शोभा ने उसके गालों को प्यार से चूम लिया । परन्तु अब अपने शरीर पर जेठानी के गर्म होंठ उसको एक मानसिक शान्ति दे रहे । दीप्ति ने शोभा के दोनों विशाल गुम्बदों पर अपने होंठ रगडते हुये एक हाथ से उसकी पीठ और गर्दन सहलाना जारी रखा । इधर शोभा ने जैसे ही दीप्ति की कमर और फिर उसके नीचे एकदम उभरे हुए मांसल नितंबों का स्पर्श किया।
जेठानी के फूले हुये लंड का विशाल सुपाङा उसके पेट से जा लगा। दीप्ति के मुहं से एक सिसकारी छूट गयी। दीप्ति तो जैसे उत्तेजना के मारे कांप ही गयी । शोभा ने जेठानी की साङी को खीन्च कर उनके बदन से अलग कर दिया और अपना चेहरा शोभा के पेटीकोट की दरार में घुसेङ दिया । सामान्यतः हिन्दुस्तानी औरतें जब पेटिकोट पहनती हैं तो जहां पेटीकोट के नाङे में गाँठ लगाई जाती है वहां पर एक छोटी से दरार रह जाती है और औरतों के अन्दरुनी अंगों का शानदार नजारा कराती है । दोस्तों, आप लोगो ने भी कई बार औरतों को कपङे बदलते देखा होगा और इस सब से भलीभांति परिचित होंगे ।
जेठानी की पेटीकोट अब उसके रास्ते का रोङा बन रहा था । दीप्ति कराही, उधर शोभा ने दीप्ति की पेटीकोट को कमर तक उठा दिया । दीप्ती ने अपनी एक हाथ से पेटीकोट को कमर में पकडे रखा और दूसरी हाथ से पेन्टी को निचे सरका दी । शोभा ने आगे बढते हुये अपनी उन्गलियों को जेठानी की विशाल नितंबों पर फिरने लगी । शोभा के होठों ने तुरन्त ही जेठानी की मख्मली जांघों के बीच में अपनी जगह बना ली । जानवरों की तरह दीप्ति की गदराई जांघों को चाट रहा था वो । दोनों टागें फ़ैला कर दीप्ति खुद ही बिस्तर पर लेट चुकी थीं । उसका अब अपने दिलोदिमाग पर कोई काबू नहीं रह गया था । शोभा के हाथ अब दीप्ति की रेशमी पैन्टी से जूझ रहे थे ।
जेठानी की पेटीकोट अब उसके रास्ते का रोङा बन रहा था । दीप्ति कराही, उधर शोभा ने दीप्ति की पेटीकोट को कमर तक उठा दिया । दीप्ती ने अपनी एक हाथ से पेटीकोट को कमर में पकडे रखा और दूसरी हाथ से पेन्टी को निचे सरका दी । शोभा ने आगे बढते हुये अपनी उन्गलियों को जेठानी की विशाल नितंबों पर फिरने लगी । शोभा के होठों ने तुरन्त ही जेठानी की मख्मली जांघों के बीच में अपनी जगह बना ली । जानवरों की तरह दीप्ति की गदराई जांघों को चाट रहा था वो । दोनों टागें फ़ैला कर दीप्ति खुद ही बिस्तर पर लेट चुकी थीं । उसका अब अपने दिलोदिमाग पर कोई काबू नहीं रह गया था । शोभा के हाथ अब दीप्ति की रेशमी पैन्टी से जूझ रहे थे ।
शोभा का पूरा बदन थरथराया और दीप्ति के मुहं से भी आह सी निकली “शोभा, देखो मेरा लंड कितना बड़ा हो गया है तेरी बुर देख कर ।” शोभा का दहिना हाथ खुद बा खुद जेठानी की उस विशालकाय लंड के चारों तरफ़ लिपट गई । दीप्ति ने एक बार शोभा की नाभि के पास चूमी और करवट बदलते हुये खुद शोभा के अधनन्गे बदन के पास जाकर लेट गई । शोभा ने दुबारा से जेठानी के सख्त लंड को अपनी मुठ्ठी में भर लिया । उत्तेजना मारे दीप्ति उसके ऊपर चढ़ चुकी थी ।
शोभा ने सोफ़े पर लेट गयी और दीप्ति ने भी उसकी टांगों के बीच में जगह बनाते हुये उंगलियों से पैन्टी को सरका कर उतार दिया । काफ़ी मादक दृश्य था । दो सैक्सी औरतें, एक सोफ़े पर साड़ी और पेटीकोट उठाये बैठी है और दूसरी उसकी टांगों के बीच में ब्लाऊज खोले बैठी मुहं को गदराई जांघों के बीच में दबाये तड़प रही है । दीप्ति ने शोभा की चूत के पास अपने होंठ रख दिये । शोभा के अन्दरूनी अंगों पर बहता पानी दीप्ति के भी गालों पर चुपड़ गया । इतना करने के बाद दीप्ति शोभा के गले से लिपट कर अपने स्तनों पर चुभते शोभा के मन्गलसूत्र को एक तरफ़ हटाते हुये कहा ” तुने किसी ब्लू फ़िल्म देखी है? “”हाँ दीदी, देखा तो मैनें भी है । लेकिन उसके बाद क्या होता है मुझे कुछ पता नहीं । तुम्हारे देवर साहब अपनी उन्गलियां तो चलाते थे मेरी चूत पर और मुझे काफ़ी मजा भी आता था लेकिन लंड से चुदाई तो अलग ही चीज़ है । उनके लंड से चुदने के बाद से तो मुझे इन तरीकों का कभी ध्यान भी नहीं आया ।” शोभा बोली
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दीप्ति ने जीभ को सिकोड़ कर थोड़ा नुकीला बनाय़ा और शोभा की चूत के ऊपरी हिस्से पर आहिस्ते से फ़िराया । शोभा के मुहं से घुटी हुई सी चीख निकली और उंगलियां दीप्ति के सिर पर जकड़ गयीं । दुबारा दीप्ति ने फ़िर से जीभ को उसी चिकने रास्ते पर फ़िराया तो वही हाल । शोभा फ़िर से होंठ दबा कर चीखी ।अनजाने में ही सही दीप्ति का निशाना सही बैठ गया था । शोभा की अनछुयी क्लिट सर उठाने लगी । दीप्ति भी पूरे मनोयोग से शोभा के चोचले को चाटने चूसने लगी गई । इधर शोभा को चूत के साथ साथ अपने चूचों में भी दर्द महसूस होने लगा । बिचारे उसके स्तन अभी तक ब्रा और ब्लाउज की कैद में थे । शोभा ने दीप्ति के के सिर से हाथ हटा ब्लाऊज के सारे हुक खींच कर तोड़ डाले । हुक टूटने की आवाज सुनकर दीप्ति ने सिर उठाय़ा और छोटी सी रेशमी ब्रा में जकड़े शोभा के दोनों कबूतरों को निहारा । शोभा की ब्रा का हुक पीछे पीठ पर था पर दीप्ति इन्तजार नहीं कर सकती थी । दोनों हाथों से खींच कर उसने शोभा की ब्रा को ऊपर सरकाया और तुरन्त ही आजाद हुये दोनों चूचों को दबोच लिया । शोभा ने किसी तरह खुद पर काबू करते हुये जल्दी से अपन ब्लाऊज बदन से अलग किया और फ़िर हाथ पीछे ले जाकर बाधा बन रही उस कमबख्त ब्रा को भी खोल कर निकाल फ़ैंका । दो सैकण्ड पहले ही दीप्ति की जीभ ने शोभा की चूत का साथ छोड़ा था ताकि वो उसके स्तनों को थाम सके परन्तु अब शोभा को चैन नहीं था ।
अपने चूचों पर दीप्ति के हाथ जहां उसे मस्त किये जा रहे थे वहीं चूत पर जेठानी की जीभ का सुकून वो छोड़ना नहीं चाहती थी । मन में सोचा कि जेठानी को भी ऐसे ही प्यार की जरुरत है पर इस वक्त वो अपने जिस्म के हाथों मजबूर हो स्वार्थी हो गयी थी । शोभा ने पास ही पड़े एक कुशन को उठा अपने चुतड़ों के नीचे व्यवस्थित किया । इस प्रकार उसकी टपकती चूत और ज्यादा खुल गय़ी । दीप्ति भी शोभा का इशारा समझ कर वापिस अपने मनपसन्द काम में जुट गई । कुशन उठाते वक्त शोभा को अहसास हुआ कि इस समय दोनों कहां और किस अवस्था में हैं । घर के हॉल में बीचों बीच दोनों महिलायें नंगे जिस्मों को लिये वासना और प्यार से भरी हुई एक दूसरे कि बाहों में समाई थीं । किसी भी क्षण घर का कोई भी पुरुष यहां आकर उन दोनों को रंगे हाथों पकड़ सकता था । परंतु जीवन में पहली बार किसी दूसरी औरत के साथ संभोग के लिये इतना खतरा लेना अनुचित नहीं था । शोभा की खुली चूत दीप्ति के मुहं में फ़ुदक रही थी और उसकी जीभ भी शोभा की चूत के अन्दर नई नई गहराईयां नापने के साथ हर बार एक नई सनसनी पैदा कर रही थी । किसी मर्द के या कहे कुमार के लंड से चुदते वक्त भी सिर्फ़ चूत की दीवारें ही रगड़ती थी ।
लेकिन दीप्ति की जीभ तो अन्दर कहीं गहरे में बच्चेदानी तक असर कर रही थी । पूरे शरीर में उठती आनन्ददायक पीड़ा ये सिद्ध करने के लिये काफ़ी थी कि किसी भी औरत के बदन को सिर्फ़ एक छोटे से बिन्दु से कैसे काबू में किया जा सकता है । कुछ ही क्षण में दीप्ति को अपनी जुबान पर शोभा की चूत का पानी महसूस हुआ । देखते ही देखते चूत में से झरना सा बह निकला । हे भगवान, इस औरत का पानी पीकर तो किसी प्यासे की प्यास बुझ जाये । दीप्ति को अपनी बदन में उठती तेज गरमी सता रहा था । परन्तु अभी देवरानी का पूरी तरह से तृप्त होना जरूरी था ताकि वो फ़िर उसके के साथ भी यही सब दोहरा सके । शायद शोभा को भी चूत में खालीपन महसूस हो रहा होगा । ऐसा सोच दीप्ति ने तुरन्त ही अपनी दो उन्गलियों को जोड़ कर उस तपती टपकती चूत में पैवस्त कर दिया । सही बात है भाई, एक औरत ही दूसरी औरत की जरुरत को समझ सकती है, शोभा दीप्ति के इस कारनामे से सांतवे आसमान पर पहुंच गई । उसके गले से घुटी घुटी आवाजें निकलने लगी और चूत ने दीप्ति की उन्गलियों को कसके जकड़ लिया । उधर दीप्ति के दिमाग में भी एक नई शरारत सूझी और उसने चूत के अन्दर एक उन्गली को हल्के से मोड़ लिया ।
इसे भी पढ़े :- कच्ची उम्र में चुदाई अब कसी हुय़ चूत की दिवारों को इस उन्गली के नाखून से खुरचने लगी । हालांकि दीप्ति शोभा को और ज्यादा पीड़ा नहीं देना चाहती थी । कहीं ऐसा ना हो कि अत्यधिक आनन्द के मारे जोर से चीख पड़े और उनके पति जाग कर यहां आ जायें । शोभा भी होठों को दातों में दबाये ये सुख भरी तकलीफ़ सहन किये जा रही थी । अचानक से शोभा छूटी । सैक्स में इतने ऊंचे बिन्दु तक पहुंचने के बाद शोभा का शरीर उसके काबू में नहीं रह गया । रह रह कर नितम्ब अपने आप ही उछलने लगे मानो किसी काल्पनिक लंड को चोद रहे हो । दीप्ति पूरे यत्न से शोभा की चूत पर अपने मुहं की पकड़ बनाये रख रही थी । लेकिन शोभा कुछ क्षणों के लिये पागल हो चुकी थी । एक ही साथ हंसने और रोने लगी । “हां दीदी हां । यहीं बस यहीं…और चाट ना प्लीज । उई मां. . . मैं गईईईई..आई लव यू डार्लिंग..” दीप्ति के बदन पर हाथ फ़िराते हुये शोभा कुछ भी बक रही थी । एक साथ आये कई आर्गेज्मों का नतीजा था ये । “कभी कुमार भी मुझे इतना मजा नहीं दे पाया….आह आह.. बस..” शोभा ने दीप्ति को अपने ऊपर खींचा और उसका चेहरा अपने चेहरे के सामने किया । दीप्ति के गालों और होठों पर उसकी खुद की चूत का रस चुपड़ा हुआ था परन्तु इस सब से शोभा को कोई मतलब नहीं था ।
ये वक्त शोभा को धन्यवाद देने का था । दीप्ति ने शोभा को जोर से भींचा और अपने होठों को उसके होठों पर रख दिया । शोभा भी अपनी जेठानी के पहलू में समा गई । दीप्ति के स्तन उसके भारी भरे हुये स्तनों के नीचे दबे पड़े गुदगुदी कर रहे थे । शोभा को सहलाते हुये दीप्ति पूछ बैठी, “क्या कुमार ने ये सब किया था?” शोभा ने ना में सिर हिलया । दोनों औरतों के बीच एक नया रिश्ता कायम हो चुका था । दीप्ति थोड़ा सा शरमाई और शोभा के पूरे बदन पर हाथ फ़िराते हुये सोचने लगी कि कहां से शुरु करे । पता नहीं, लेकिन दीप्ति उसे वो सब देना चाहती थी जो एक मर्द एक औरत के बदन में ढूंढता है । शोभा के हाथों ने दीप्ति की सारी को पकड़ कर उसकी कमर पर इकट्ठा कर दिया । दोनों हाथों से दीप्ति की खुली हुई विशाल गांड सहलाते हुये सोच रही थी कि अब उसे भी जेठानी की लंड चाटनी होगी ।
अपने देवरानी शोभा को पूरी तरह चोदने के बाद अगली सुबह दीप्ति उठीं तो उसकी पूरे बदन में मीठा मीठा दर्द हो रहा था । कमरे में कोई नहीं था । पति गोपाल कभी के उठ कर छोटे भाई के साथ सुबह की सैर के लिये जा चुके थे । दीप्ति हैंग ओवर (शराब पीने के कारण अगली सुबह व्यक्ति का सिर दुखता है, इसी को हैंग ओवर कहते है.) की वजह से सिर को दबाये चादर के नीचे बिस्तर में लेटी हुईं थीं । थोड़ा सामान्य हुईं तो पिछली रात की बातें याद आने लगीं । शराब के नशे मेँ कैसे एक अश्लील सिनेमा से उनके उत्तेजना बढीँ और अपनी लंड से पहली बार अपनी देवरानी की झांटेदार बुर की घनघोर चुदाई का आनन्द उठाया था और उन दोनों की आवाजें सुनकर अजय खुद दरवाजे तक चला आया था । इसी रात, जीवन में पहली बार पतिदेव ने भी पीछे से गांड मारी थी । अजय के बारे में सोचते ही उसे याद आया कि व घर की बडी बहु है और उसे अब तक उठ जाना चाहिये था । रात में जो कुछ भी हुआ वो अब उतना गलत नहीं लग रहा था । शायद उनकी भाग्य में अपनी देवरानी के द्वारा अपने लंड को मर्द बनाने का सौभाग्य लिखा था । पहली बार शोभा की बुर चोदी थी, इससे पहले हस्तमैथुन से और पति के द्वारा लाए गए एक फ्लॉसलाईट(मर्दोँ के हस्तमैथुन यन्त्र, एक नल जैसे चिज मेँ लंड डाल के पम्पिँ किया जाता है ) से अपनी लंड की गरमी को शांत करती थी । बूर चोदने मेँ मिला सुख दीप्ति पहले कभी नहीँ पाई थी ।
कमरे में बिखरे हुये कपड़े इकट्ठे करते दीप्ति को अब सब कुछ सामान्य लग रहा था । खैर, अब उनको एक संस्कारी बहु की तरह नीचे रसोई में जाकर देवरानी का हाथ बटाना था । उधर ये शंका भी कि शायद अजय ने कल रात को दोनों को संभोग करते देख लिया था… दीप्ति के मन में डर पैदा कर रही थी । दीप्ति रसोई में घुसी तो शोभा सब के लिये चाय बना रही थी । “गुड माँर्निंग, दीदी!”, “ओह, गुड माँर्निंग शोभा ।” दीप्ति ने जवाब दिया । तभी अजय वहां पानी लेने आ गया । दीप्ति तो जड़वत रह गई । कहीं अजय ने सच में अपनी माँ को शोभा की बुर मेँ चोदते देख तो नहीं लिया, या वो सिर्फ़ अन्दाजा लगा रही हैं ।
“सो, कैसा रहा सब कुछ माँ ।” अजय ने सामान्य बनते हुये पूछा । “बेटा, कल शाम को शराब पीने के बाद, हम सब को थोड़ा नशा हो गया था ।” कहते हुये दीप्ति के हाथ काँप रहे थे । “कल रात को मजा आया कि नहीं ।” आखिरकार अजय अपना गुस्सा जाहिर कर ही डाला । अब शक की कोई गुन्जाईश नहीं थी की अजय ने कल रात मम्मी और चाची का चोदाई देख लिया था और मम्मी की मूषल लंड को भी । “देखो बेटा, ये सब गलती से हुआ ।” अब दीप्ति भी टूट गई । दिल जोरो से धड़क रहा था और तेजी से चलती सांसो से सीना भी ऊपर नीचे हो रहा था । अजय कुछ नहीँ बोला और सिधे अपने कमरे मेँ चला गया । शर्म के मारे दीप्ति के दोनों गाल लाल हो गये थे ।
अजय बचपन से अपने माता पिता के साथ एक ही कमरे में सोता आया था । जब वो तेरह साल का हुआ तो एक दिन दीप्ति को उसके बिस्तर में कुछ धब्बे मिले । उस दिन से उसने अजय का दूसरे कमरे में सोने का इन्तजाम कर दिया और साथ ही उसे नहलाना और उसके कपड़े बदलना भी बन्द कर दिया ।
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रात को जब थोड़ी देर के लिये दीप्ति की आंख भी लग गयी । अचानक अजय के कमरे से कुछ आवाज आयी तो वो जाग गयी, धीरे से वो कमरे के अन्दर दाखिल हुयी और अजय के बिस्तर के पास पहुँच गयी । आंखें जअब अन्धेरे की अभ्यस्त हुयीं तो देखा कि अजय चादर के अन्दर हाथ डाले किसी चीज को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था । अजय, कमरे में अपनी मां कि मौजूदगी से अनभिज्ञ मुट्ठ मारने में व्यस्त था । शायद अजय कल की रात को अपनी माँ और चाची के करतुत को सपनों में ही दुहरा रहा था । “आह, चाचीईईई” अजय की कराह सुनकर दीप्ति को कोई शक नहीं रह गया कि अजय उसकी सच्चाई जान चुका था । शोभा और अपने के लिये उनका मन घृणा से भर उठा ।
आखिर क्यूं हो गया ऐसा ? आज उनका लाड़ला ठीक उनके ही सामने कैसा तड़प रहा है । और वो भी उस शोभा का नाम ले कर, नहीं । अजय को और तड़पने की जरुरत नहीं है । उसकी मां है यहां पर उसकी हर ज़रुरत को पूरा करने के लिये । अजय के लिये उनके निर्लोभ प्रेम और इस कृत्य के बाद में होने वाले असर ने क्षण भर के लिये दीप्ति को रोक लिया । अगर उनके पति अजय के पिता को कुछ भी पता चल गया तो ? कहीं अजय ये सोचकर की उसकी मां एक सामान्य औरत नहीँ है उन्हें नकार दे तो ? तो, तो, तो? बाकी सब की उसे इतनी चिन्ता नहीं थी । और अपने पति को वो सब कुछ खुद ही बता कर समझा सकती थी कि अजय की जरुरतों को पूरा करना कितना आवश्यक था । नहीं तो जवान लड़का किसी भी बाजारु औरत या मर्द के साथ आवारागर्दी करते हुये खुद को किसी भी बिमारी और परेशानी में डाल सकता था । पता नही कब, लेकिन दीप्ति चलती हुई सीधे अजय की तरफ़ बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गईं । अजय ने भी एक साये को भांप लिया । तुरन्त ही समझ गया की ये शख्स कोई औरत ही है और मम्मी ही होगी । पिछले रात की द्रुश्य मन मेँ आते ही अपने लन्ड पर उसकी पकड़ मजबूत हो गयी ।बचपन से देखती आई उसकी ममतामयी मम्मी बाकी औरतोँ से कितनी भिन्न है, उनकी गठीले औरत की बदन पर ईतना बडा पुरुषत्व ! मम्मी को औरत नाम दिया जाए या मर्द । कितना लम्बा और मोटा था मम्मी का लंड और क्या चोदाई कर रही थी चाची की बुर मेँ ! किसी hardcore porn फिल्म से कम नहीँ । कितना परेशान था सवेरे से । दसियों बार मुत्ठ मार मार कर टट्टें खाली कर चुका था । लेकिन अब मम्मी उसके पास थी । और वो ही उसको सही तरीके से शान्त कर पायेंगी ।
दीप्ति कांपते कदमों से अजय कि तरफ़ बढ़ी । सही और गलत का द्वंद्ध अभी तक उसके दिमाग में चल रहा था । डर था कि कहीं अजय उससे नफ़रत ना करने लगे । तो वो क्या करेगी ? कहीं वो खुद ही अपने आप से नफ़रत ना करने लगे । इन सारे शकों के बावजूद व अजय को धीरे से पुकारा
“अजय बेटा तुम अभी तक सोए नहीँ ।” दीप्ति बेटे से पुछी । अजय ने मम्मी की बात का कोई जवाब नहीँ दिया । अजय को चुप देख दीप्ति दोबारा पुछी- “तुम अभी तक जाग रहे हो बेटा । ”
“ये सब क्या है मम्मी, मेरा तो कुछ समझ नहीँ आ रहा है पागल हो जाउंगा ।” अजय गुस्से से बोला ।
दीप्ति को झटका लगा । कैसे बेटे को समझाए । लेकिन व आज सारी बात का खुलासा करेगी । यही सोचते हुए दीप्ति बोली-“बेटा, मैँ तुम्हारी माँ ही हुं, पर मेरे शरीर मेँ बदकिस्मत से पुरुषोँ की निशानी आ चुकी है । पर बेटा मैँ तुम्हेँ अब भी उतना ही प्यार करती हुं जितना पहले करती थी ।” कहने के साथ दीप्ति की आंखोँ से आंसु टपक पडे। मम्मी की आंखोँ मेँ पछतावे के आंसु देख अजय का गुस्सा एकदम ठंडा पठ गया । मम्मी की एक हाथ को हाथ मेँ लिए बोला-“सॉरी मम्मी, मुझे ये सब बातेँ मालुम नहीँ था, व तो आपको चाची के साथ देखा और बस!!!!!!!
दीप्ति आंखोँ मेँ आए आंसु पोछा और चेहरे पर मुस्कराहट लाती हुई बोली- “सॉरी बेटा, मुझे इस तरह हॉल मेँ तुम्हारे चाची के साथ नहीँ करना चाहिए था । पर बेटा न चाहते हुए भी मुझे इस पुरुषांग को अपनी नारी शरीर मेँ अपनाना पडा ।”
“नहीँ मम्मी, अब मुझे आपसे कोई शिकायत नहीँ । पर क्या आपको ऐसी ही रहनी पडेगी ।”
“अब मेरी इस बदलाव के कारण मेरी शरीर की जरुरतेँ भी बदल गई । और शरीर की मांग को पुरा करने के लिए ही मैँने तुम्हारी चाची के साथ हो गई । मजबुरी मेँ मुझे अब इसी पुरुषत्व को अपना कर जिन्दगी गुजारनी होगी । ऐसा नहीँ करती तो बेटा मैँ आज तुम्हारी मम्मी नहीँ रहती बल्की एक मर्द बन गई होती ।” दीप्ति ने बातेँ खतम की । मम्मी की बातेँ सुनकर अब अजय का मन साफ हो चुका था । व माँ के गोद मेँ सर रखते हुए बोला-“मैँ आपके साथ हुं मम्मी, आप मेरी प्यारी मम्मी हो ।” “क्या आप इसी शरीर के साथ पूरी उम्र बिताऐंगी? अचानक आपकी शरीर मेँ ये बदलाव कैसे आया ।” अजय ने पुछा ।
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“बेटा, मैँ तो पूरी तरह से मर्द बनने जा रही थी । पर सामाजिक नियमोँ का उलंघन करके मैँ पुरुष बनना नहीँ चाहती थी । इसिलीए हमने डॉक्टरोँ के सलाह लिए और मेरी बदलती शरीर को रोक लिया । पुरे शरीर पहले जैसा स्त्री का ही रहा लेकिन मेरे शरीर मेँ लंड और अंडकोष बढ चुका था । इसे हटाना बहुत मुस्किल काम था । जब डॉक्टरोँ ने बताया की मैँ इसी के साथ भी खुशी से जी सकती हुं तो तुम्हारे पिताजी और मैँ खुशी-खुशी इसे ग्रहण किया । जो तुमने कल देखा वही सच है । अब मैँ भी इस सच को मानसिक तौर से अपना लिया है ।” दीप्ति आँसूओँ को पोछती हुई बोली ।
“लेकिन अब मैं आ गयी हूँ, तुम्हें मुठ मारने की कोई जरुरत नहीं ।” कहने के साथ ही मम्मी ने चादर के अन्दर हाथ डाल कर लन्ड के ऊपर जमे अजय के हाथों को अपने दोनो हाथों से ढक लिया । अब जैसे जैसे मम्मी लन्ड पर हाथ ऊपर नीचे करती अजय का हाथ भी खुद बा खुद उपर नीचे होता. “मम्मी” अजय ने फ़ुसफ़ुसाया । अपना हाथ लन्ड से अलग कर अजय उठ खडा हुआ और अपनी मम्मी को बिस्तर पर लिटा दिया । मम्मी की साडी को पेटीकोट समेत कमर के उपर तक सरका दिया और अपनी माँ के 8 इंच के मुरझा पडा लंड को मुठ्ठी मेँ भर लिया । दीप्ति ने अपनी बेटे के हाथों को पूरी आजादी दे दी उस शानदार खिलौने से खेलने की । अपने सपनों की मलिका को पास पाकर अजय का लन्ड भी फुल गया । अजय ने मम्मी के लन्ड पर उन्गलियां फ़िराईं तो उसकी नसों में बहता गरम खून साफ़ महसूस हुआ । आंखे बन्द करके पूरे ध्यान से मम्मी की उस महान औजार को दोनो हाथों से मसलने लगा । मम्मी की ये लन्ड इतना कठोर, इतना तगड़ा, इससे पहले अपनी जिन्दगी में उसने कभी औरत की ऐसे लन्ड को हाथ में नहीं लिया था ।
याद नहीं अजय के जन्म के बाद क्या दवा खाया था कि आज उसकी औरत के बदन पे ये लन्ड उग अया जो अपने पति, बेटे के लंड से भी कहीं आगे था । अपने ही ख्यालों में डूबी हुई उस मां को ये भी याद नहीं रहा कि कब अजय की मुट्ठी ने उसकी लंड को कसके दबाकर जोर जोर से दुहना चालू कर दिया । लन्ड की मखमली खाल खीचने से दीप्ति दर्द से कराह उठी । हाथ बढ़ा कर दीप्ति ने बेटे की अनियंत्रित कलाई को थामी । अजय ने दूसरे हाथ से अपनी मम्मी की चुचियोँ को सहलाया । खुद को घुटनों के बल बिस्तर के पास ही स्थापित करती हुई अजय ने मम्मी की लन्ड को मुठियाना चालू रखा और आनन्द देने के काम में लग गया । “हाँ आआआआ” । शरीर पर दौड़ती जादुई उन्गलियों का असर था ये, और ज्यादा आनन्द की चाह में दीप्ति बेकरारी में अपनी कमर हिलाने लगी ।
तुरन्त ही झुकते हुये अजय ने पूरा मुहं खोला और मम्मी की तन्नाये लंड को निगल लिया । उसके होंठ मम्मी की लंड के निचले हिस्से पर जमे हुये थे । दीप्ति के हाथ अजय के कन्धों पर जम कर उसे अपने पास खीचने लगे । अन्धेरी रात में अजय भी उस मादा शरीर को अपने पूरे बदन पर महसूस करना चाहता था । लेकिन उसकी मम्मी ने तो पूरे कपड़े पहने हुये है । दीप्ति की उत्तेजना अपने चरम पर थी । उधर अजय ने भी शरीर को थोड़ा और झुकाते हुए मम्मी की खड़ी लंड तक पहुंचने की चेष्टा की । जो शोभा ने किया वो वह भी कर सकता है । तो क्या हुआ अगर लंड चूसने का उसका अनुभव जीरो है, भावनायें तो प्रबल हैं ना । एक बार के लिये उसे ये सब लार का समुन्दर सा बह रहा था । आखिर पहली बार कोई औरत की लंड गलत लगा किन्तु अपने ही मम्मी के साथ सैक्स करने से ज्यादा गलत भला क्या होता ।
मन थोड़ा अजीब सा हो रहा था लेकिन फ़िर उसकी लंड का ख्याल आते ही नया जोश भर गया । अगर उसने आज मम्मी की लंड नहीं चूसा तो वह कल फ़िर से इस आनन्द को पाने के लिये शोभा के पास जा सकती है । अजय अब अपनी माँ का चेहरा देखना चाहता था वही चेहरा जो किसी देवी की मूर्ति की तरह चमक रहा था । हाथ बढ़ाकर बिस्तर के पास की लैम्प जलाई तो लम्बे बालों मे ढका चेहरा आज कुछ बदला हुआ लगा । दीप्ति ने अपना चेहरा अजय की तरफ़ घुमायी । दीप्ति समझ गईं अभी नहीं तो कभी नहीं वाली स्थिति आ खड़ी हुई है । अगर उन्होनें वासना और अनुभव का सहारा नहीं लिया तो इस मानसिक बाधा को पार नहीं कर पायेंगी और फ़िर अजय भी कभी उनका नहीं हो पायेगा । अपनी लंड चुसवाते हुए भी दीप्ति के दिल में सिर्फ़ एक ही जज्बा था कि वो अजय को सैक्स के चरम पर अपने साथ ले जायेगी जहां व सब कुछ भूल कर बस लडके को चोदेगी । दो मिनट पहले के मानसिक आघात के बाद दीप्ति का लंड थोड़ा नरम पड़ गया था वो फ़िर से अपने शबाब पर लौट आया । मां के लम्बे बाल अलग ही रेशमी अहसास पैदा कर रहे थे ।
पिछली रात से बहुत ज्यादा अलग ना सही लेकीन काफ़ी मजेदार था ये सब । दीप्ति ने भी अब सब कुछ सोचना छोड़ कर बेटे के सिर को हाथों से थाम लिया और फ़िर अपनी भारी नितम्ब उछालती हुई बेटे के मुहं को चोदने लगी । दीप्ति का नियंत्रण खत्म हो गया । वो अभी झड़ना नहीं चाहती थी परन्तु जोश, वो गर्मी और मुहं से आती गोंगों की आवाजों से आपा खो कर उसकी वीर्य बह निकली.”उई मां” दीप्ति सीत्कारी । अजय सब समझ गया । मम्मी छूटने वाली थी । उसकी लंड की नसों मे बहते वीर्य का आभास पाकर अजय ने अपना मुहं हटाय़ा और मुट्ठी में जकड़ कर मम्मी की लंड को पम्प करने लगा ।
अजय का लंड भी फुंकर मारने लगा था । ये देखते हुए दीप्ति अपनी लंड से अजय का हटा दिया और अपनी लंड को अजय के लंड से भिडा दी । मम्मी अब दोनोँ के लंड को अपनी मुठ्ठी मेँ पकड ली और एकसाथ दोनोँ लंड को मुठियाने लगी । अजय माँ की चिकनी लंड का घर्षण अपने लंड पर महसूस कर रहा था ।
“मेरा निकलने वाला है मम्मी ।” अजय बोला ।
“थोडा रुक जाओ बेटा एकसाथ ऑर्गाजम करते हैँ ।” शोभा हाँफती हुई बोली ।
“ हा माँ ।” अजय राजी हो गया । दीप्ति दोनोँ के लंड मुठियाना चालु रखा । उसकी हाथ तेजी से चलने लगी । मम्मी की भारी नितम्ब बिस्तर पर उछलने लगा था । अजय अपनी दोनोँ हाथ से माँ के कंधा पकड के रखा था । दोनोँ के लंड फुल गए थे और सुपाडेँ एकदम लाल हो चुके थे ।
“मम्मी…मैँ…अब रहा नहीँ जाता ।” अजय दर्द मेँ कराह उठा ।
“बस एक और सेकॉन्ड रुक जाओ बेटा ।” दीप्ति उत्तेजना मेँ कांपती हुई बोली ।
फिर दीप्ति दोनोँ के लंड को मजबुती से पकडती हुई एक पिस्टन के भांति अपनी हाथ उपर-निचे करने लगी । दोनोँ के नंगे शरीर उत्तेजना के मारे कांप रहे थे, धडकनेँ बढ चुकी थी । तभी मम्मी की आवाज सुनते ही अजय का धर्य का बांध टुट गया और उसके लंड से विर्य की धार निकल पडी और दीप्ति भी कराह उठी मानो रो पडेगी, आआआई….ईईई… के साथ ही दीप्ति ने जोर से गांड उछाली और एक पिचकारी के साथ मम्मी की गुलाबी सुपाड़े में से वीर्य की धार छूट कर सीधे अजय के पेट पर पड़ी । दीप्ति ने दोनो आंखें बन्द कर लीं । दीप्ति की हाथ दोनों के वीर्य से सना हुआ था । अभी तक झटके लेती हुई अपनी लंड के साथ अजय के लंड को भी दीप्ति ने निचोड़ निचोड़ कर खाली कर दिया । मां के हाथ और पेटीकोट उसकी वीर्य से सने हुये थे । दीप्ति ने अजय की जांघों पर सिमटी पड़ी चादर से अपनी लंड रगड़ कर साफ़ की । अजय ने बिस्तर पर एक तरफ़ हटते हुये अपनी मां के लिये जगह बना ली । दीप्ति भी अजय के पास ही बिस्तर पर लेट गयी । खुद को इस तरह से व्यवस्थित किया की अजय का चेहरा ठीक उनके स्तनों के सामने हो और लंड उसके हाथ में।
ब्लाउज के सारे बटन खोल कर दीप्ति ने उसे अपने बदन से आज़ादी दे दी। अजय की आंखों के सामने मां की नन्गी जवानी बिखरी पड़ी थी । जबसे सैक्स शब्द का मतलब समझने लगा था उसकी मां ने कभी भी उसे अपने इस रूप का दर्शन नहीं दिया था । अजय का सिर पकड़ दीप्ति ने उसे अपने चूंचों मे छिपा लिया । अजय थोड़ा सा कुनमुनाया. “श्श्श्श”. “मेरे बच्चे, तेरे लिये तेरी मां ही सब कुछ है । अजय के होठों ने अपने आप ही मां के निप्पलों को ढूंढ लिया । जीवन में पहली बार ना सही लेकिन इस समय अपनी मां के शरीर से अपनी भूख मिटाने का ये अनोखा ही तरीका था । मां के दोनों निप्पल बुरी तरह से तने हुये थे । शायद बहुत उत्तेजित थी । अपने बेटे के लिये उसकी मां ने अपने आनन्द की परवाह भी ना की । अजय का मन दीप्ति के लिये प्यार और सम्मान से भर गया । मां बेटे एक दूसरे से बेल की तरह लपटे पड़े थे । अजय का एक पावं दीप्ति की कमर को जकड़े था तो हाथ और होंठ मां के सख्त हुये उरोजोँ पर मालिश कर रहे थे । दीप्ति की लंड में भी धीरे धीरे जान लौटने लगी । पर दिन भर का थका अजय जल्दी ही अपनी ममतामयी मां के आगोश में सो गया । दीप्ति थोड़ी सी हताश तो थी किन्तु अजय की जरुरतों को खुद से पहले पूरा करना उनकी आदत में था । खुद की टांगों के बीच में आग ही लगी थी पर अजय को जन्मजात अवस्था में खुद से लिपटा कर सोना उसे सुख दे रहा था । थोङी देर में दीप्ति भी नींद के आगोश में समा गयी । जो कुछ भी उन दोनों के बीच हुआ वो तो एक बड़े खेल की शुरुआत भर था । एक ऐसा खेल जो इस घर में अब हर रात खेला जाने वाला था ।
पिछले चौबीस घन्टों में अपने ही घर की सीधी सादी दिखने वाली भद्र महिला के साथ हुये उसके अनुभव को याद करके अजय का लंड फ़िर तेजी से सिर उठाने लगा । बिस्तर पर उसकी मां दीप्ति जन्मजात नन्गी अवस्था में उसकी बाहों में पड़ी हुयीं थीं । मां के मूषल लंड को याद करके अजय का हाथ अपने आप ही मम्मी के मुरझे लंड पर पहुंच गया । हथेली में लंड को भर कर अजय हौले हौले से दबाने लगा । शायद मां जाग जाये । अजय ने धीरे से मां की तरफ़ करवट बदलते हुये अपना लंड उनके भारी नितंबों की दरार में घुसेड़ दिया । अपनी गांड पर दबाब पाकर मां की आंखें खुल गईं । “अजय, ये क्या कर रहे हो?”, मां बुदबुदाईं । अजय ने जवाब में अपने गरम तपते होंठों से माँ के कानों को चूमा । बस इतना करना ही काफ़ी था उस उत्तेजना से पागल हुई औरत के लिये । दीप्ति ने खुद पीठ के बल लेटते हुये अजय के हाथों को खींच कर अपनी झांटो के पास रखा और एक पैर सिकोड़ कर घुटना मोड़ते हुये उसे अपनी मुरझी हुई लंड के पूरे दर्शन कराये । अजय ने मां की झांटो भरी लंड पर उन्गलियां फ़िराई ।
अजय शायद ये सब सीखने में सबसे तेज था । थोडी देर ध्यान से देखने के बाद बुद्धीमत्ता दिखाते हुये उसने अपनी उन्गली को मां की गांड के छेद के पास से कम बालों वाली जगह से ठीक ऊपर की तरफ़ ठेला और अंडकोष को सहलाने लगा । इस तरह धीरे धीरे ही सही अजय अपनी मां की लंड को मसलने लगा । मां सिसकी और अपनी गदराए जांघोँ को और ज्यादा खोल दिया । साथ ही माँ की झाँटोँ से भरी पूरा लंड और बडे-बडे अंडकोष अजय के सामने आ गया ।. अब एक हाथ से काम नही चलने वाला था । अजय ने कुहनियों के बल मां के ऊपर झुकते हुये एक और उन्गली को अपनी मां की गांड के छेद को घिसने की जिम्मेदारी सौंप दी । “आह, मेरे बच्चे”, अत्यधिक उत्तेजना से दीप्ति चींख पड़ी । बाल पकड़ कर अजय का चेहरा अपनी तरफ़ खींचा और अपने रसीलें गरम होंठ उसके होठों पर रख दिये । आग में जैसे घी ही डाल दिया दीप्ति ने।
दीप्ति ने बिस्तर पर बिखरे हुये नाईट गाऊन को उठा अपनी लंड को रगड़ रगड़ कर साफ़ किया । सवेरे से बनाया प्लान अब तक सही तरीके से काम कर रहा था । अजय को अपना सैक्स गुलाम बनाने की प्रक्रिया का अन्तिम चरण आ गया था । दीप्ति ने अजय के लंड को मुत्ठी में जकड़ा और घुटनों के बल अजय के उपर झुकते हुये बहुत धीरे से अपनी लंड को अजय के मुंह के अन्दर समा दिया । पूरी प्रक्रिया अजय के लिये किसी परीक्षा से कम नहीं थी । “हां मां, प्लीज, फ़क मी, फ़क मी…ओह फ़क” जोर जोर से चिल्लाता हुआ अजय अपनी ही मां की लंड को चुसे जा रहा था । अजय के चेहरे को हाथों में लेते हुये दीप्ति ने उसे आदेश दिया “अजय, देखो मेरी तरफ़” । धीरे धीरे एक ताल से कमर हिलाते हुये वो अपनी लंड की भरपूर सेवा कर रही थीं ।
उस तगड़े हथियार का एक वार भी अपनी हाथ से खाली नहीं जाने दिया । वो नहीं चाहती थी की अजय को कुछ भी गलत महसूस हो । “मै कौन हूं तुम्हारी?” लंड को अजय के होँठोँ पर फ़ुदकाते हुए पूछा । “म्म्मां” अजय हकलाते हुये बोला । इस रात में इस वक्त जब ये औरत उसके साथ हमबिस्तर हो रही है तो उसे याद नहीं रहा की मां किसे कहते है । “मैं वो औरत हूं जो इतने सालों से तुम्हारी हर जरूरत को पूरा करती आई है । है कि नहीं?” दीप्ति ने पासा फ़ैंका । आगे झुकते हुये एक ही झटके में अपना पूरा लंड अजय के मुंह में डाल दिया । “आआआआआह, हां मां, तुम्हीं मेरे लिये सब कुछ हो!” अजय हांफ़ रहा था । उसके हाथों ने मां की चिकनी उभरी गांड को पकड़ कर नीचे की ओर खींचा । दीप्ति ने अपने नितंबों को थोड़ा ऊपर कर दुबारा से लंड को बेटे के मुंह के अंदर तक पेल दिया और कमर ऊपर उछालते हुये मुंह में जबर्दस्त धक्के लगाने लगी।
अजय के ऊपर झुकते हुये दीप्ति ने सही आसन जमाया । “अजय, अब तुम जो चाहो वो करो । ठीक है” दीप्ति की मुस्कुराहट में वासना और ममता का सम्मिश्रण था । अजय ने सिर उठा कर मां के निप्पलों को होठों के बीच दबा लिया । दीप्ति के स्तनों से बहता हुआ करन्ट सीधा उनकी लंड में पहुंचा । हांलाकि दोनों ही ने अपनी सही गति को बनाये रखा । जवान जोड़ों के विपरीत उनके पास घर की चारदीवारी और पूरी रात थी । दीप्ति ने खुद को एक हाथ अपनी लंड को सहलाते हुये दूसरे हाथ से अपनी चूचीं पकड़ कर अजय के मुहं में घुसेड़ दी । अजय ने भी भूखे जानवर की तरह बेरहमी से उन दो सुन्दर स्तनों का मान मर्दन शुरु कर दिया । मां के हाथ की जगह अपना हाथ इस्तेमाल करते हुये अजय ने निप्पल को जोर से उमेठा । नीचे मां और पुत्र अपनी-अपनी लंड हिलते हुये दोनों के बीच उत्तेजना को नियन्त्रण में रख रही थी । अब मां ने आसन बदलते हुये एक नया प्रयोग करने का मन बनाया । मम्मी की टांगों को चौड़ा करके अजय उनके बीच में बैठा तो उसका लंड खड़ी अवस्था में ही मां के तने हुए लंड से जा भिड़ा।
दो सेकेन्ड पहले भी ये लंड यहीं था लेकीन उस वक्त यह उनके अन्दर समाया हुआ था । अजय को गोद में बैठा कर दीप्ति ने एक बार फ़िर से अपनी लंड के साथ बेटे के लंड को अपनी मुठ्ठी में भरा । दोनोँ लंड के सुपाड़े के ऊपर के फोर-स्कीन फ़िसल रहे थे । “ऊईईई माआआं” दीप्ति सीत्कारी । दीप्ति ने बेटे के कन्धे पर दांत गड़ा दिये । इतना ज्यादा आनन्द दीप्ति के लिये अब असहनीय हो रहा था । मां पुत्र की ये सैक्सी कुश्ती सिसकियों और कराहों के साथ कुछ क्षण और चली । पसीने से तर दोनों थक कर चूर हो चूके थे पर अभी तक इस राऊंड में चरम तक कोई भी नहीं पहुंचा था । थोड़ी देर रुक कर दीप्ति अपने लाड़ले बेटे के सीने और चेहरे को चूमने चाटने लगी । मां के जोश को देख कर बेटा समझ गया।
दीप्ति के गुलाबी होंठों पर जीत की मुस्कान बिखर गई । इतनी देर से चल रहे इस हस्तमैथुन कार्यक्रम से दोनोँ के लंड का तो बुरा हाल था । “अजय बेटा । बस बहुत हो गया । अब मैँ झड़ रही हुं । मां कल भी तेरे पास आयेगी” दीप्ति हांफ़ने लगी थी । अजय का भी हाल बुरा था । उसके दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया था । समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दे । बस माँ के फ़ुदकते हुये मुम्मों को हाथ के पंजों में दबा कमर उछाल रहा था । “ऊहहहहहहहहहह! हां! ऊइइइ मांआआ!” चेहरे पर असीम आनन्द की लहर लिये दीप्ति बिना किसी दया के दोनोँ के मुस्टंडे लंड को जोर जोर से आगे-पिछे करने लगी । “आ आजा बेटा, खुश कर दे अपनी मां को”, अजय को पुचकारते हुये बोली । इन शब्दों ने जादू कर दिया । अजय रुक गया । दोनों जानते थे कि अभी ये कार्यक्रम कफ़ी देर तक चल सकता है लेकिन उन दोनों के इस अद्भुत मिलन की साथी उन आवाजों को सुनकर गोपाल किसी भी वक्त जाग सकते थे और यहां कमरे में आकर अपने ही घर में चलती इस पाप लीला को देख सकते थे । काफ़ी कुछ खत्म हो सकता था उसके बाद और दोनों ही ऐसी कोई स्थिति नहीं चाहते थे।
अजय ने धक्के देना बन्द कर आंखे मूंद ली । मम्मी की लंड ने गरम खौलते हुये वीर्य की बौछारे उड़ेल दी । “ओह” दीप्ति चीख पड़ी । जैसे ही विर्य की पहली बौछार का अनुभव उन्हें हुआ बेटे को कस के भींच लिया । अगले पांच मिनट तक दीप्ति की लंड से वीर्य की कई छोटी बड़ी फ़ुहारें निकलती रहीं । थोड़ी देर बाद जब ज्वार उतरा तो दीप्ति बेटे के शरीर पर ही लेट गय़ीं । भारी भरकम स्तन अजय की छातियों से दबे हुये थे । दोनोँ के लंड एक दुसरे से रगड खा रहे थे । अजय ने मां के माथे को चूमा और गर्दन को सहलाया । “मां, मैं हमेशा सिर्फ़ तुम्हारा रहूंगा । तुम जब चाहो जैसे चाहो मेरे संग सैक्स कर सकती हो ।
इसी तरह घर का माहोल चलता रहा । दीप्ति अपने बेटे और शोभा के साथ अलग-अलग समय पर अपनी कामवासना पुरी करती रही । एक दिन रात को शोभा की आंखें थकान और नींद से बोझिल हो चली थी और दिमाग अब भी पिछले २-३ महीनों के घटनाक्रम को याद कर रहा था । अचानक ही कितना कुछ बदल गया था उसके सैक्स जीवन में । पहले अपने ही बहन जैसी जेठानी की बदली हुई लिँग और अकस्मात ही बना उसका सेक्स संबंध फ़िर जेठानी के द्वारा संभोग के दौरान नये नये प्रयोग किसी मादा शरीर से मिला अनुभव नितांत अनूठा था । पर रात में इस समय बिस्तर में किसी पुरुष के भारी कठोर शरीर से दबने और कुचले जाने का अपना अलग ही आनन्द है । जेठानी औरत तो थी ही पर उसकी विशाल लंड मेँ गजब का ताकत था । जेठानी की चोदाई से मिली आनंद पहले कभी नहीँ मिली थी उसे । बडी बेरहमी से उसे चोदा था जेठानी ने । काश! दीप्ति इस समय उसके पास होती । दुसरा था भतीजा अजय जो अभी नौजवान है और उसे बड़ी आसानी प्रलोभन देकर अपनी चूत चटवाई जा सकती है । फ़िर वो दीप्ति की लंड की तरह ही उसके मुहं पर भी वैसे ही पानी बरसायेगा । मजा आ जायेगा । पता नहीं कब इन विचारों में खोई हुई उसकी आंख लग गयी । देर रात्रि में जब प्यास लगने पर उठी तो पूरा घर गहन अन्धेरे में डूबा हुआ था । बिस्तर के दूसरी तरफ़ कुमार खर्राटे भर रहे थे । पानी पीने के लिये उसे रसोई में जाना पड़ेगा सोच कर बहुत आहिस्ते से अपने कमरे से बाहर निकली । सामने ही अजय का कमरा था।
शोभा चुपके से अजय के कमरे का दरवाजा खोला और दबे पांव भीतर दाखिल हो गई । कमरे में घुसते ही उसने किसी मादा शरीर को अजय के शरीर पर धीरे धीरे उछलते देखा । दीप्ति के अलावा और कौन हो सकता है इस वक्त इस घर में जो अजय के इतना करीब हो । अजय की कमर पर सवार उसके लन्ड को अपनी भारी गांड के छेद में समाये दीप्ति तालबद्ध तरीके से गांड मरवा रही थी । खिड़की से आती स्ट्रीट लाईट की मन्द रोशनी में उसके उछलते चूंचे और मुहं से निकलती धीमी कराहो से दीप्ति की मनोस्थिति का आंकलन करना मुश्किल नहीं था । “अभी अभी मुझे चोदी है और फ़िर से अपने बेटे के ऊपर चढ़ गई” मन ही मन दीप्ति को गन्दी गन्दी गालियां बक रही थी शोभा । खुद के तन भी वही आग लगी हुई थी ।
उधर दीप्ति पूरे जोशो खरोश के साथ अजय से चुदने में लगी हुई थी । रह रहकर उसके हाथों की चूड़ियां खनक रही थी । दीप्ति की 8 इंच लम्बा और मोटा लंड उछलने से हवा मेँ लहरा रहा था और गले में पड़ा मंगल्सूत्र भी दोनों स्तनों के बीच उछल कर थपथपा कर उत्तेजक संगीत पैदा कर रहा था । ये सब शोभा की चूत में फ़िर से पानी बहाने के लिये पर्याप्त था । आभूषणों से लदी अजय के ऊपर उछलती जेठानी काम की देवी ही लग रही थी । दीप्ति की उछलती लंड देखते ही शोभा की पहले से नम बुर की दिवारोँ ने अब रिसना चालु कर दिया था । शोभा को अब मम्मी की लंड चाहिये था । सिर्फ़ पत्थर की तरह सख्त जेठानी की लंड ही उसे तसल्ली दे पायेगी । अब यहां खड़े रह कर मां पुत्र की काम क्रीड़ा देखने भर से काम नहीं चलने वाला था । शोभा मजबूत कदमों के साथ दीप्ति की और बढ़ी और पीछे से उसका कन्धा थाम कर अपनी और खींचा । हाथ आगे बढ़ा शोभा ने दीप्ति के उछलते कूदते स्तनों को भी हथेलियों में भर लिया । कोई और समय होता तो दीप्ति शायद उसे रोक पाती पर इस क्षण तो वो एक उत्तेजना से गुजर रही थी । अजय नीचे से आंख बन्द किये माँ के गांड मेँ धक्के पर धक्के लगा रहा था । इधर दीप्ति को झटका तो लगा पर इस समय स्तनों को सहलाते दबाते शोभा के मुलायम हाथ उसे भा रहे थे । कुछ ही क्षण में आने वाली नई स्थिति को सोचने का समय नहीं था अभी उसके पास । शोभा को बाहों में भर दीप्ति उसके सहारे से अजय के तने हथौड़े पर कुछ ज्यादा ही जोश से कूदने लगी । “शोभा–आह–आआह”, दीप्ति अपनी लंड में उठती विर्य की लहरों से जोरो से सिसक पड़ी । वो भी थोड़ी देर पहले ही अजय के कमरे में आई थी । शोभा की तरह उसकी लंड की आग भी एक बार में ठंडी नहीं हुई थी और फिर चोदने के बाद गांड नहीं मराई थी ।
आज अजय की बजाय अपनी प्यास बुझाने के उद्देश्य से चुदाई कर रही थी । अजय की जब नींद खुली तो मां बेदर्दी से उसके फ़ूले हुये लंड को अपनी गांड में समाये उठक बैठक लगा रही थी और माँ के आधे तने मूषल लंड और अंडकोष उसके पेट पर रगड खा रहे थे । लाचार अजय एक हाथ बढा कर माँ के लंड को पकड लिया और माँ के उछलने से लंड अपने आप पम्प होता गया । आज रात अपनी मां की इस हिंसक करतूत से संभल भी नहीं पाया था कि दरवाजे से किसी और को भी कमरे में चुपचाप आते देख कर हैरान रह गया । पर किसी भी तरह के विरोद्ध की अवस्था में नहीं छोड़ था आज तो मां ने ।
“शोभा तुम्हें यहां नहीं आना चाहिये था, प्लीज चली जाओ ।” दीप्ति विनती कर रही थी । शोभा के गदराये बदन को बाहों में लपेटे दीप्ति उसकी हथेलियों को अपने दुखते स्तनों पर फ़िरता महसूस कर उसकी उत्तेजना बढ गई । लेकिन अपने बेटे के सामने.. नहीं नहीं । रोकना होगा ये सब ।
किन्तु किशोर अजय का लंड तो मां के मुख से अपनी चाची का नाम सुनकर और ज्यादा कठोर हो गया । दीप्ति ने शोभा को धक्का देने की कोशिश की और इस हाथापाई में शोभा के बदन पर लिपटी एक मात्र रेशमी चादर खुल कर गिर पड़ी । हॉल से आकर थकी हुई शोभा नंगी ही अपने बिस्तर में घुस गई थी । जब पानी पीने के लिये उठी तो मर्यादावश बिस्तर पर पड़ी चादर को ही लपेट कर बाहर आ गई थी । शोभा के नंगे बदन का स्पर्श पा दीप्ति के तन बदन में बिजली सी दौड़ गई, उसकी सोया लंड जाग उठा । एकाएक उसका विरोध भी ढीला पड़ गया । अजय के लंड को चोदते हुये दीप्ति और कस कर शोभा से लिपट गई । नीचे अजय अपनी माता की गिली हुई गांड के छेद को अपने लंड से भर रहा था तो ऊपर से चाची ने दाहिना हाथ आगे बढ़ा कर मम्मी की तने हुए लंड को कस के पकड ली । किसी अनुभवी खिलाड़ी की तरह शोभा चाची ने मम्मी के तने हुए लंड के फोर-स्कीन को उपर-निचे करते हुए लाल सुपाडे को अंदर बाहर करने लगी । लंड पर चाची की उन्गलियों का चिर परिचित स्पर्श पा मम्मी मजे में कराहा, “ईईईई”. “हां शोभा”, शोभा चाची ने भी नीचे देखते हुये हुंकार भरी । दीप्ति की गांड अजय के लंड के कारण चौड़ी हुई पड़ी थी और शोभा भी उसे बख्श नहीं रही थी । रह रह कर बार बार जेठानी के लंड के सुपाडे पर जिभ फिरा रही थी । दीप्ति बार बार अजय की जांघों पर ही अपनी भारी नितम्ब को गोल गोल घुमा और ज्यादा उत्तेजना पैदा करने की कोशिश कर रही थी।
अजय के सामने ही शोभा एक हाथ से मम्मी की 10 इंच के लंड को पम्प कर रही थी और दूसरे से मम्मी के चूचों को निचोड़ रही थीं । चाची के होंठ मम्मी के होंठों से चिपके हुये थे और जीभ शायद कहीं मां के गहरे गले में गोते लगा रही थी । आंख के कोने से अजय ने चाची को मम्मी की लंड मुठियाते देखा तो झटके से चाची की स्तन को थाम लिया । अपना हाथ मम्मी की लंड पर से खींच कर चाची अजय के कानों मे फ़ुसफ़ुसाई “अजय, देखो तुम्हरी मम्मी क्या कर रही हैँ ? जिस्मों की उत्तेजना में कुछ भी स्वीकार कर लेना काफ़ी आसान होता है । हां, अपने बेटे के सामने दीप्ति पूरी तरह से चरित्रहीन साबित हो चुकी थी।
उसके बेडरूम के बाहर वो सिर्फ़ उसकी मां थीं । वो भी उन दोनों के इस कृत्य का बदला चुकाने को उत्सुक था । पर किससे कहे, दोनों ही उससे उम्र में बड़ी होने के साथ साथ भारतीय पारिवारिक परम्परा के अनुसार सम्मानीय थी । और जब से अपनी मम्मी की रहस्य सामने आई है उसका तो चैन ही उड गया था । मम्मी को मर्द कहा जाए या औरत ! औरत की भी इतनी बडी लंड होती है ? मम्मी की चोदाई व अपनी आँखोँ से देख चुका है , बड़ी बेरहमी चाची की बुर मेँ चोद रही थी । कितनी ताकत थी मम्मी की लंड मेँ । दोनों ही के साथ उसका संबंध पूरी तरह से अवैध था । इसीलिये जब उसकी चाची ने मात्र एक चादर में लिपट कर उसके कमरे में प्रवेश किया और अपने भारी भारी स्तनों को मां के कन्धे से रगड़ना शुरु किया तो वो उन पर से अपनी नज़र ही नहीं हटा पाया । चाची की नाजुक उन्गलियां मम्मी के तने हुये लंड पर थिरक रही थीं तो बदन उसके पूरे शरीर से रगड़ खा रहा था ।
दोनों ही औरतों के बदन से निकला पसीने खुश्बू अजय को पागल किये जा रही थी । दीप्ति ने जब अजय को शोभा के नंगे शरीर पर आंखें गड़ाये देखा तो उन्हें भी अहसास हुआ कि अजय को भरपूर प्यार देने के बाद भी आज तक उसके दिल में अपनी चाची के लिये जगह बनी हुई है । दोनों औरतों के बदन के बीच में शोभा की चूत से निकलता आर्गैज्म का पानी भरपूर चिकनाहट पैदा कर रहा था ।
“देखो अजय” शोभा ने उसकी माँ के फ़ूले लंड पर नजरें जमाये हुए कहा । “कैसा कड़क हो गया है?” मम्मी की लंड को मुट्ठी में भरे भरे ही शोभा चाची धीरे से बोली । मम्मी के गले से आवाज नहीं निकल पाई । उत्तेजना में उन्होनें शोभा चाची के भारी नितम्बों को थाम कर उसे मसलने लगी ताकि फुंकार मारती हुई लंड की किसी से तो रगड़ मिले ।
शोभा ने चेहरा दीप्ति की तरफ़ घुमाया और अपने होंठ दीप्ति के रसीले होंठों पर रख दिये । होंठों को चूसते हुये भी उसने मम्मी के लंड को मुठियाना जारी रखा । नजाकत के साथ दीप्ति के सुपाड़े पर अंगूठा फ़िराने लगी । ” ईईईईई”, दीप्ति सिसक पड़ी । अंगूठे के दबाव से मम्मी की लंड में खून का दौड़ना तेज हो गया । मम्मी की लंड पर चाची की कसती मुट्ठी से मचल सा गया । दीप्ति की तो जान ही निकल गई । हे भगवान । इन सब कामों में शोभा पूरी सावधानी बरत रही थी कि किसी को भी कुछ भी जोर जबरदस्ती जैसा ना लगे । दीप्ति ने नीचे से अपनी चौडी गांड को उछाला शोभा कि मुट्ठी को चोदने का प्रयास किया पर तब तक शोभा ने अपनी मुट्ठी खोल सिर्फ़ सहारा देने के लिये लंड को दो उन्गलियों से पकड़ा हुआ था।
तभी दीप्ति अजय के लंड पर से उठ खडी हुई और शोभा की बगल में लेट गई । दीप्ति ने कुछ बोलना चाहा पर समझ में नहीं आया कि क्या कहे । दिमाग पूरी तरह दिल से हारा हुआ अजय और शोभा के हाथों की कठपुतली सा बना हुआ था । चाची का इशारा पा अजय चेहरे को आगे खींच कर मम्मी की लंड अपनी खुले मुंह में उतार दिया । दीप्ति ने तुरन्त ही दोनों हाथों से बेटे का चेहरा दबा जानवरों की तरह धक्के लगा शुरु कर दिया । दीप्ति का लंड अजय के गले को अन्दर तक भरा हुआ था । दीप्ति की लंड अब जी भरकर बहना चाहती थी और उसके हाथ शोभा की बुर खोज रहे थे ताकि वापिस उसकी बुर में अपनी लंड डाल सके । पर शोभा तो पहले से ही मां बेटे का सम्पूर्ण मिलन करवाने में व्यस्त थी । एक हाथ की उन्गलियों से दीप्ति के लंड को थामे दूसरे से उसकी भारी गांड को सहला सहला कर जेठानी को और उकसा रही थी । “हां दीदी, शाबास, लंड को वैसे ही चटवाते रहो जैसे हम इससे अपनी चूत चुसवाना चाहते थे । दीप्ति के गालों से गाल रगड़ती हुई शोभा बोली । अजय चौंका । निश्चित ही दोनों औरते उसके ही बारे में बातें कर रही थी ।
आंखों के कोनों से दीप्ति ने शोभा के मोटे मोटे चूचों को झूलते देखा । इस स्थिति में भी वो उन दोनों को जी भर के निचोड़ना मसलना चाहती थी । लेकिन अपनी लंड चटवाने स्वाद भी वो छोड़ना नहीं चाहती थी । मन शोभा के लिये कृतज्ञ था कि उसने मां को अपने बेटे के और करीब ला दिया है । अजय जो अपनी आंखों के सामने अपनी जेठानी और अजय की उत्तेजक हरकतें देख रहा था, अब फ़िर से सक्रिय हो उठी । थोड़ा सा उठ कर उसने दोनों हाथों से दीप्ति के उछलते स्तनों को दबोच लिया । शोभा को भी अब खुल कर दोनों मां बेटे के बीच में आना ही पड़ा । दीप्ति के हाथ अपने चूचों पर पड़ते ही शोभा कराह उठी । अन्दर तक सिहर उठी शोभा चाची । मम्मी के खुले सिग्नल से उनकी चूत में चिकने पानी का दरिया बनना चालू हो गया।
ठीक इसी तरह से अगर अजय मेरी चूत पर भी जीभ फ़िराये तो ? पहली बार तो बस चूम कर रह गया था । आज इसको सब कुछ सिखा दूंगी, यहीं इसकी मां के सामने । और इस तरह से दीप्ति के लिये भी रोज अपनी लंड चुसाई का इन्तजाम हो जायेगा । इन्ही ख्यालों में डूबी हुय़ी शोभा अजय की सीने को छोड़ जेठानी की विशाल गांड को सहलाने लगी । और दीप्ति अधीरतापूर्वक अपने फ़ड़कते लंड को अजय के मुख में पागलों की भांति पेल रही थी । अजय ने हाथ बढ़ा मम्मी के दूसरे निप्पल को मसलना चाहा परन्तु शोभा ने बीच में ही उसका हाथ थाम उसे रोक लिया । क्षण भर के लिये मां बेटे को छोड़ शोभा बिस्तर के सिरहाने पर जा कर बैठ गयी । मम्मी ने चारों तरफ़ नज़र घुमा चाची को देखने का असफ़ल प्रयास किया । अपनी जांघों को अजय की पीठ पर लपेटते हुये दीप्ति बेटे के मुहं को चोदने लगी । माथे पर एक गीले गरम चुम्बन से मम्मी की आंखें खुलीं । शोभा ने उनके पीछे से आकर ये आसन बनाया था । अपने खुले रेशमी बालों को मम्मी के स्तनोँ पर फ़ैला, होठों को खोल कर उसके होठों से भिड़ा दिया।
शोभा चाची ने जब अपनी थूक सनी जीभ मम्मी के मुख में डाली तो जवाब में मम्मी ने भी लपककर अपनी जुबान को शोभा चाची के गरम मुख में सरका दिया । दोस्तों सम्भोग के समय होने वाली थूक के आदान प्रदान की ये प्रक्रिया बड़ी ही उत्तेजक एवं महत्वपूर्ण होती है । चाची के स्तन मम्मी के सिर पर टिके हुये थे और व उनको अपने मुहं में भरने के लिये उतावला हो रही थी । चाची का मंगलसूत्र उसके गालों से टकराकर ठंडा अहसास दे रहा था और साथ ही साथ उनके शादीशुदा होने की बात भी याद दिला रहा था । शायद इन्हीं विपरीत परिस्थितियों से निकल कर मम्मी भविष्य में जबर्दस्त चुदक्कड़ बन पायेंगी और फ़िर भीषण चुदाई का अनुभव पाने के लिये घर की ही एक भद्र महिला से ज्यादा भरोसेमंद साथी भला कौन मिलेगा ? चाची अब होठों को छोड़ अब मम्मी के उरोजोँ को चूमना लगीं । आगे सरकने से उनके स्तन मम्मी के चेहरे पर आ गये थे । जब मम्मी के होठों ने गदराये चूचों पर निप्पलों को तलाशा तो स्तनों मे अचानक उठी गुदगुदी से शोभा हंस पड़ी । कमरे के अन्दर का वातावरण अब तीनों प्राणियों के लिये काफ़ी सहज हो चला था
अजय अब सारी शर्म त्याग करके पूरी तरह से दोनों औरतों के मस्त बदन को भोगने के लिये तैयार हो चुका था । दीप्ति के दिमाग से भी बन्धन, मर्यादा और लज्जा जैसे विचार गायब हो चुके थे । अब उन्हें भी अपने बेटे के साथ साथ किसी तीसरे प्राणी के साथ प्रणय क्रीड़ा करने में भी कोई संकोच ना था । शोभा चाची की शरारतें भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी । मम्मी के पेट का सहारा ले वो बार बार शरीर ऊपर को उठा अपने चूचों को मम्मी के होठों की पहुंच से दूर कर देतीं । कभी मम्मी की जीभ निप्पलों पर बस फ़िर कर रह जाती तो बिचारे और उत्तेजित हो कर कड़क हो जाते । खुद ही उन दोनों तरसते यौवन कपोतों को जेठानी के मुहं में ठूस देना चाहती थी । और दीप्ति ने यहां भी उसे निराश नहीं किया । चाची की उछल-कूद से परेशान मम्मी ने अजय के सिर को छोड़ कर दोनों हाथों से चाची के झूलते स्तनों को कस कर पकड़ा और दोनों निप्पलों को एक दूसरे से भिड़ा कर एक साथ दातों के बीच में दबा लिया मानों कह रही हो कि अब कहां जाओगी बच कर । शोभा आंखें बन्द करके सर उठाये सिसक सिसक कर मम्मी की करतूतों का मजा ले रही थी । दीप्ति आज उनके साथ दुबारा से सहवास रत थी।
शोभा ने जब आंखें खोली तो दीप्ति को अपनी तरफ़ ही देखते पाया । उसने अजय के मुहं में झटके लगाना बन्द कर दिया था । कमर पर लिपटी उसकी टांगें भी जब खुल कर बिस्तर पा आ गयी थी । जब शोभा ने सिर उठाया तो उसके चेहरे पर छाई वासना और तन्मयता से दीप्ति का दिल टूटने लगा । दोनों ने काफ़ी देर तक एक दूसरे की आंखों मे देखा । अजय उनके निप्पलों पर अपने होंठों से मालिश कर रहा था और इसी वजफ़ से रह रह कर चाची की चूत में बुलबुले उठ रहे थे । अपने प्लान की कामयाबी के लिये शोभा को अब आगे बढ़ना था।
शोभा ने दीप्ति के सिर के पीछे यन्त्रवत उछलती अपनी कमर को रोका और आगे सरक आई । अजय ने मम्मी के लंड को कस के मुट्ठी में जकड़ लिया और होठों को सिर्फ़ सुपाड़े पर गोल गोल फ़िराने लगा । शोभा ने भी कुहनियों पर खुद को व्यवस्थित करते हुये भारी गांड को जेठानी के चेहरे पर जमा दिया । इस समय शोभा की गीली टपकती चूत दीप्ति के प्यासे होंठों से काफ़ी दूर थी । और मम्मी उत्तेजना में जीभ को घूमा घूमा कर चाची के तर योनि-प्रदेश तक पहुंचने का प्रयास कर रही थी इधर शोभा चाची ने अजय को उसके हाल पर छोड़ अपना ध्यान जेठानी दीप्ति के ऊपर लगा दिया । दीप्ति के चेहरे के पास जा शोभा ने उनके गालों को चूमा । दीप्ति ने भी जवाब में शोभा के दोनों होठों को अपने होठों की गिरफ़्त में ले लिया । दोनों औरते फ़िर से एक दूसरे में तल्लीन हो गईं । अजय ने सिर उठा कर देखा तो उसकी मां और चाची जैसे किसी दूसरे ही संसार में थी।
दीप्ति के मुहं में जीभ फ़िराते हुये शोभा अजय की लार का स्वाद महसूस कर सकती थी उधर दीप्ति भी शोभा की जीभ पर खुद उसका, शोभा का और अजय का मिला जुला रस आराम से चाट पा रही थी । आज की रात तीनों ही प्राणी एकाकार हो गये थे । चाची ने दुबारा से मम्मी के खड़े मुस्टंडे लंड के एक तरफ़ अजय के होठों को जमा दूसरी तरफ़ से खुद पूरा मुहं खोल गरमा गरम रॉड को जकड़ लिया । अब इस तरीके से वो दोनों एक दूसरे को किस भी कर सकती थीं और दीप्ति का तन्नाया पुरुषांग भी उनके चार गरम होठों के बीच में आराम से फ़िसल सकता था । मम्मी ने जब ये दृश्य देखा तो मारे जोश के उसने शोभा चाची के दोनों नितम्बों को कस के जकड़ लिया । लेकिन चाची की चूत से बहते झरने को वो अपने प्यासे होठों तक नहीं ला पायी । गांड को नीचे खीचने पर शोभा के होंठ मम्मी के लंड का साथ छोड़ दे देते थे और शोभा चाची ये होने नहीं दे रही थीं । खैर मम्मी ने शोभा की कमर को चूमना चाटना चालू कर दिया । शोभा पूरी तन्मयता से जेठानी के मोटे लंड पर लार टपका उसे होठों से मल रही थी । अजय भी जल्द ही ये कला सीख गई । दोनों दीप्ति के उस कड़कड़ाते पुरुषांग को आइसक्रीम की तरह दोनों तरफ़ से एक साथ चूस रही थीं । बीच-बीच में चाची और अजय के होंठ कभी मिलते तो एक दूसरे को किस करने लगते और यकायक मम्मी की लंड पर दवाब बढ़ जाता । इतनी पूजा करने के बाद तो दीप्ति के लंड में जैसे नया स्वाद ही पैदा हो गया।
इससे पहले व कभी एक साथ दो लोगोँ से अपनी लंड नहीँ चटवाई थी । या तो ये दूसरी औरत की खूश्बूदार लार है या फ़िर दीप्ति की मूषल लंड से रिसने वाले प्रि-कम जो चुतड के उछलते वक्त बह कर यहां जमा हो गया था । हां, पक्के तौर पर लंड की खाल पर नमकीन स्वाद दीप्ति के पसीने या सुपाड़े से रिसते चिकने पानी का ही था । शोभा के दिमाग में कुछ अलग ही खिचड़ी पक रही थी ।
मम्मी के लंड से होठों को हटा अपने गाल उससे सटा दिये । अजय ने भी चाची की देखा देखी अपने गाल को भी मम्मी के लंड से सटा दिय़ा । दीप्ति की लंड भी इधर उधर झटके खाता हुआ दोनों के ही चेहरों को अपने रस और उनके थूक के मिश्रण से पोतने लगा । इस तरह थोड़ी देर तक तड़पाने के बाद चाची ने मम्मी के लंड को अजय के हवाले कर दिया । अजय ने झट से मम्मी के लंड के फ़ूले हुये गुलाबी सुपाड़े पर होंठों को गोल करके सरका दिया । सुपाड़ा जब उसके गले के भीतरी नरम हिस्से से टकराया और थोड़ा सा गाड़ा तरल भी लन्ड से छूट गया । शायद मम्मी अब ज्यादा देर तक नहीं टिक पायेगा. “शोभा ? तुम किधर जा रही हो?”, दीप्ति जल्दी ही झड़ने वाली थी और व ये पल उसके साथ बांटना चाहती थी । “आपके और अपने लिये इसको कुछ सिखाना बाकी है..” शोभा ने जवाब दिया । चाची का पूरा चेहरा भीग गया था । वो चिकना मिश्रण उनके गालों से बह कर गर्दन से होता हुआ दोनों चूचों के बीच में समा रहा था । चूत अब पानी से भरकर लबलबा रही थी । उसका छूटना जरुरी था । दीप्ति को आज बल्कि अभी इसी वक्त उनकी चूत को चाटना होगा तब तक जब तक की उन्हें आर्गेज्म नहीं आ जाता।
शोभा ने हथेलियोँ से मम्मी के चुचियोँ को दबाती अपनी चूत को उसके मुहं के ठीक ऊपर हवा में व्यवस्थित किया । दीप्ति ने सिर को उठा जीभ की नोंक से चूत की पंखुड़ियों को सहलायी । सामने ही अजय अपनी मम्मी की लंड की चूसाई में व्यस्त था । अब शोभा की चूत जेठानी के मुहं में समाने के लिये तैयार थी और उसकी आंखों के सामने अजय अपनी माँ की लंड खाने में जुटी हुई थी । शोभा ने अपनी टांगें चौड़ा की ताकि नीचे बैठने में आसानी हो । मम्मी ने भी फ़ुर्ती दिखाते हुये चाची की नंगी कमर को जकड़ा और सहारा दे उनकी खुली चूत को अपने मुहं के ठीक ऊपर रखा । शोभा ने एक नाखून पेट में गड़ा उसे इशारा दिया तो मम्मी ने अपनी जीभ चूत के बीच में घुसेड़ दी । आधी लम्बाई तक चाची की चूत में जीभ सरकाने के बाद मम्मी ने उसे चूत की फ़ूली दीवारों पर फ़िराया और फ़िर किसी रसीले संतरे के फ़ांक के जैसे चाची की चूत के होंठों को चाटने लगी । शोभा को तो जैसे जन्नत का मज़ा आ रहा था पर अभी जेठानी की असली दीक्षा बाकी थी।
चाची ने दो उन्गलियों से चूत के दरवाजे को चौड़ाया और खुद आगे पीछे होते हुये अपनी तनी हुई चिकनी क्लिट को मम्मी की जीभ पर मसला । “हांआआआ.. आह”, चाची ने मम्मी को इशारा करने के लिये आवाज़ निकाली । जब मम्मी की जीभ क्लिट पर से हटी तो चाची शान्त बैठी रहीं । दुबारा मम्मी की जीभ ने जब क्लिट को सहलाया तो “हां..” की ध्वनि के साथ चाची ने नाखून मम्मी के पेट में गड़ा दिया । कुछ “हां हां” और थोड़े बहुत धक्कों के बाद मम्मी समझ गई की उनकी देवरानी क्या चाहती हैं । चाची की ट्रैनिंग पा मम्मी पूरे मनोयोग से उनकी चूत को चाटने चोदने में जुट गई । मम्मी का ध्यान अब अपने मोटे लन्ड और बेटे से हट गया था । शोभा चाची हथेलियां मम्मी के उरोजोँ पर जमाये दोनों आंखें बन्द किये उकड़ू अवस्था में बैठी हुई थीं । उनकी पूरी दुनिया इस समय मम्मी की जीभ और उनकी चूत के दाने में समाई हुई थी । मम्मी की जीभ में जादू था । जब पहली बार आईसक्रीम चाटने की भांति मम्मी ने अपनी जीभ को क्लिट पर फ़िराय़ा, लम्बे और टाईट स्ट्रोक, तो चाची की चूत बह निकली । कितनी देर से बिचारी दूसरों के आनन्द के लिये कुर्बानियां दिये जा रही थी । लेकिन अब भी काफ़ी धीरज और सावधानी की जरुरत थी । अजय जैसे कुशल मर्द तक उनकी पहुंच पूरी तरह से जेठानी के मूड पर ही निर्भर थी ।
चूत के दाने से उठी लहरें शोभा के पूरे शरीर में चींटी बन कर रेंगने लगी थीं । बार-बार जेठानी के स्तनोँ में नाखून गड़ा वो उनको रफ़्तार बढ़ाने के लिये उकसा रही थीं । दोनों जेठानी-देवरानी मुख मैथुन के मामले में अनुभवहीन थे किन्तु शोभा जो थोड़ी देर पहले ही अपनी जेठानी के साथ काम संसार के इस मजेदार रहस्य से परिचित हुई थी, जानती थी कि अगर जेठानी रफ़्तार के साथ छोटे स्ट्रोक से उसकी क्लिट को सहलायेगी तो वो जल्दी ही आर्गैज्म की चरमसीमा पार कर लेंगी । “आह..और तेज..तेज !”, शोभा अपने विशाल नितंबों को दीप्ति के ऊपर थोड़ा हिलाते हुये कराही । अजय के हाथ भी शोभा की आवाज सुन कर रुक गये । जब उसने चाची के चेहरे की तरफ़ देखा तो आश्चर्यचकित रह गया । दोनों आंखें बन्द किये चाची पसीने से लथपथ जैसे किसी तपस्या में लीन थी । चाची ने मम्मी के पेट पर उन्गलियों से छोटे घेरे बना जतला दिया कि उसे क्या पसन्द है । मम्मी भी तुरन्त ही चाची के निर्देश को समझ गई । जैसे ही मम्मी की जीभ सही जगह पर आती शोभा उसके जवान भरे हुये सीने पर चिकोटी काट लेती । अपनी चूत के मजे में उन्हें अब मम्मी के दर्द की भी परवाह नहीं थी । “ऊह.. आह.. आह.. उई मांआआआ… आह”, शोभा के मुहं से हर सांस के साथ एक सीत्कार भी छुटती । पागलों की तरह सारे बाल खोल जोर जोर से सिर हिलाने लगी थीं । शर्मो हया से दूर शोर मचाती हुई शोभा को दीन दुनिया की कोई खबर ना थी । अभी तो खुद अगर कमरे में उसका पति भी आ जाता तो भी वो जेठानी के मुहं को ना छोड़ती थी । दीप्ति की जीभ इतने परिश्रम से थक गयी थी । क्षण भर के लिये रुका तो शोभा ने दोनों हाथों के नाखून उसकी खाल में गहरे घुसा दिये “नहीं दीदी अभी मत रुक.. प्लीज…आह” । बेचारा दीप्ति कितनी देर से अपनी देवरानी की हवस बुझाने में लगी हुई थी । चाची तो अपनी भारी भरकम गांड लेकर मम्मी के चेहरे के ऊपर ही बैठ गय़ीं थीं । फ़िर भी बिना कुछ बोले पूरी मेहनत से चाची को बराबर खुश कर रही थी।
मम्मी का लंड थोड़ा मुरझा सा गया था । पूरा ध्यान जो देवरानी की चूत के चोंचले पर केन्द्रित था । अजय बिना पलकें झपकाये एकटक चाची की भारी चौडी नितम्ब मम्मी के मुहं पर उछलते देख रहा था । शोभा, उसकी चाची, इस वक्त पूरी तरह से वासना की मूर्ति बनी हुई थी । सब कुछ पूरी तरह से आदिम और पाशविक था । उसका अधेड़ मादा शरीर जैसे और कुछ नहीं जानता था ना कोई रिश्ता, ना कोई बंधन और ना कोई मान्यता । कमरे में उपस्थित तीनों लोगों में सिर्फ़ वही अकेली इस वक्त मैथुन क्रिया के चरम बिन्दु पर थीं । उनकी इन स्वभाविक भाव-भंगिमाओं से किसी ब्लू-फ़िल्म की नायिकायें भी शरमा जायेंगी । दीप्ति की समझ में आ गयी कि अगर किसी औरत को इस तरीके से इस हद तक गरम कर दिया जाये तो वो सब कुछ भूल कर उसकी गुलाम हो सकती है ।
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